Jharkhand News: झारखंड में वेतन मद में ट्रेजरी (कोषागार) से हुई करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कदम बढ़ा दिए हैं. केंद्रीय एजेंसी ने इस घोटाले को लेकर प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर ली है. इस जांच के दायरे में रांची, हजारीबाग और बोकारो ट्रेजरी से जुड़ी उन प्राथमिकियों को शामिल किया गया है, जहां नियमों के विरुद्ध भुगतान किए जाने के गंभीर आरोप हैं.
पांच जिलों में 40 करोड़ के घोटाले का खुलासा
यह मामला तब प्रकाश में आया जब प्रधान महालेखाकार चंद्र मौली सिंह ने ट्रेजरी जांच के दौरान पुलिस विभाग के वेतन मद में संदिग्ध लेन-देन की जानकारी वित्त विभाग को दी. शुरुआती जांच में बोकारो और हजारीबाग ट्रेजरी से फर्जी भुगतान की पुष्टि हुई, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया. अब तक रांची, देवघर, रामगढ़ और चाईबासा समेत पांच जिलों में लगभग 40 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की बात सामने आ चुकी है.
12 ट्रेजरी और अन्य विभाग भी रडार पर
जांच की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधान महालेखाकार की दूसरी रिपोर्ट में राज्य की कुल 12 ट्रेजरी में संदिग्ध निकासी के संकेत मिले हैं. अब केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग में भी फर्जी भुगतान की आशंका जताई गई है. इसके आधार पर वित्त विभाग ने संबंधित जिलों को गहन जांच के आदेश जारी किए हैं, जिससे आने वाले दिनों में कई अन्य अधिकारियों और कर्मियों पर गाज गिर सकती है.
SIT की कार्रवाई और अब तक 12 गिरफ्तारियां
राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. रांची में पशुपालन विभाग के लेखपाल मुनिंद्र कुमार और उसके सहयोगी संजीव कुमार को पकड़ा गया है, जिन पर 20-20 लाख रुपये मूल वेतन दिखाकर फर्जी निकासी का आरोप है. इसके अलावा हजारीबाग से 6, बोकारो से 3 और देवघर ट्रेजरी से स्वास्थ्य कर्मियों के नाम पर फर्जीवाड़ा करने के आरोप में एक महिला की गिरफ्तारी हुई है.
उच्चस्तरीय समिति कर रही दस्तावेजों की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है. समिति वर्तमान में बोकारो ट्रेजरी के फाइलों को खंगाल रही है. सरकार और ED की इस दोहरी जांच से उन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है, जिन्होंने फर्जी तरीके से राशि का भुगतान लिया या सरकारी धन का दुरुपयोग किया है.