Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य में बिना नक्शा पास कराए बने अवैध भवनों को वैध (नियमित) करने की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया शुरू कर दी है. नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने इस उद्देश्य के लिए “बिल्डिंग प्लान अप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम” (BPAMS) पोर्टल का आधिकारिक शुभारंभ किया. इस योजना के माध्यम से सरकार का लक्ष्य राज्य के लगभग सात लाख भवन मालिकों को राहत पहुंचाना और उनके निर्माण को कानूनी मान्यता देना है.
आवेदन के लिए 60 दिनों का समय
भवन मालिक अपने मकानों को नियमित कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. सरकार ने इसके लिए केवल 60 दिनों की समय सीमा निर्धारित की है. आवेदन जमा होने के बाद, विभाग अगले छह महीनों के भीतर दस्तावेजों और निर्माण की जांच पूरी करेगा. जांच में पात्र पाए जाने वाले भवनों को निर्धारित सरकारी शुल्क जमा करने के बाद आधिकारिक रूप से वैध घोषित कर दिया जाएगा.
नियमितीकरण के लिए निर्धारित मानक
योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ कड़े तकनीकी मानक तय किए हैं. इस योजना के दायरे में केवल वही भवन आएंगे जिनका कुल क्षेत्रफल अधिकतम 300 वर्ग मीटर और ऊंचाई 10 मीटर तक होगी. साथ ही, केवल G+2 (ग्राउंड प्लस दो मंजिल) तक के निर्माणों को ही नियमितीकरण की पात्रता दी जाएगी. इन मानकों को पूरा करने वाले भवन मालिकों को ही कानूनी वैधता का प्रमाण पत्र मिल सकेगा.
इन भवनों को नहीं मिलेगी कोई राहत
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना सभी प्रकार के अवैध निर्माणों के लिए नहीं है. सरकारी जमीन, सार्वजनिक संस्थानों, आवास बोर्ड और वक्फ बोर्ड की भूमि पर बने मकानों को इस योजना से बाहर रखा गया है. इसके अलावा जलग्रहण क्षेत्र, टैंक बेड, पार्किंग के लिए आरक्षित स्थल और विवादित भूमि पर बने भवनों को भी कोई राहत नहीं दी जाएगी. साथ ही, सीएनटी (CNT) और एसपीटी (SPT) एक्ट का उल्लंघन करने वाले निर्माणों पर भी यह नियम प्रभावी नहीं होगा.