National News: पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई प्रभावित होने से पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हो रहे हैं और ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है. भारत भी इस चुनौती से निपटने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रहा है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए कार पूलिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्प अपनाने की अपील की है. अब केंद्र सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है.
मोदी सरकार ने 37500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को दी मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऊर्जा, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इनमें सबसे बड़ी घोषणा कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना को लेकर की गई है. सरकार ने 37500 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी दी है, जिसका मकसद देश में उत्पादित कोयले का बेहतर उपयोग करना और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करना है.
सरकार चाहती है कि घरेलू कोयले से गैस, यूरिया और कई महत्वपूर्ण रसायनों का उत्पादन बढ़ाया जाए. इससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और विदेशी बाजारों पर निर्भरता कम होगी. योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संसाधनों का मूल्य बढ़ाना और भारत को ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाना है.
क्या है कोल गैसीफिकेशन और यह कैसे काम करता है
आमतौर पर ऊर्जा उत्पादन के लिए कोयले को सीधे जलाया जाता है. लेकिन कोल गैसीफिकेशन में कोयले को जलाने के बजाय एक रासायनिक प्रक्रिया के जरिए गैस में बदला जाता है. इस प्रक्रिया में कोयले से सिंथेटिक गैस यानी सिनगैस तैयार की जाती है. इस सिनगैस का इस्तेमाल वैकल्पिक ईंधन के तौर पर किया जा सकता है. साथ ही यह रसायन और उर्वरक बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में भी उपयोगी होती है. पारंपरिक तरीके से कोयला जलाने की तुलना में यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करती है.
कोयले को सीधे जलाने से ज्यादा साफ मानी जा रही यह तकनीक
जब कोयले को सीधे जलाया जाता है तब भारी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और राख वातावरण में फैलती है. इससे प्रदूषण बढ़ता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. लेकिन गैसीकरण प्रक्रिया में गैस के उपयोग से पहले ही इन अशुद्धियों को फिल्टर कर अलग कर लिया जाता है. यही वजह है कि इसे अपेाकृत स्वच्छ तकनीक माना जा रहा है.
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक भविष्य में भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है क्योंकि इससे ऊर्जा उत्पादन के साथ प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
बिजली से लेकर पेट्रोल मिश्रण तक कई काम आएगी सिनगैस
कोल गैसीफिकेशन से तैयार होने वाली सिनगैस का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है. इससे टर्बाइन चलाकर बिजली पैदा की जा सकती है. इसे सिंथेटिक प्राकृतिक गैस में भी बदला जा सकता है.
इसके अलावा इससे मेथनॉल तैयार किया जा सकता है जिसे पेट्रोल में मिलाया जा सकता है. डी मिथाइल ईथर, अमोनिया और कई जरूरी रसायन व उर्वरक भी इसी प्रक्रिया के जरिए बनाए जा सकते हैं. इससे देश में औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
आयात घटेगा तो मजबूत होगी देश की ऊर्जा सुरक्षा
भारत अभी प्राकृतिक गैस, उर्वरक और कई ऊर्जा उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. अगर देश में कोयले से ही गैस, मेथनॉल और उर्वरक बनने लगते हैं तो विदेशों से इन्हें खरीदने की जरूरत कम होगी. इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और अंतरराष्ट्रीय संकटों का असर भी भारत पर कम पड़ेगा. सरकार का मानना है कि कोल गैसीफिकेशन जैसी योजनाएं भविष्य में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी.
ऊर्जा संकट के दौर में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत
दुनिया भर में बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों के बीच भारत अब वैकल्पिक और घरेलू संसाधनों पर ज्यादा जोर दे रहा है. सरकार की कोशिश है कि देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जाए ताकि वैश्विक संकटों का असर आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर कम पड़े. कोल गैसीफिकेशन योजना को इसी दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है.