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  • 2026-05-13

Jharkhand News: टेंडर कमीशन घोटाले में नया मोड़, वीरेंद्र राम के सीए मुकेश मित्तल ने हाईकोर्ट से वापस ली याचिका

Jharkhand News: झारखंड के चर्चित टेंडर कमीशन घोटाले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. निलंबित चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे मुकेश मित्तल ने झारखंड हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है. यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के उस आदेश को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थी जिसमें मुकेश मित्तल के खाते से मिले 5 करोड़ रुपये जब्त करने का निर्देश दिया गया था.
फर्जी पैन कार्ड और शेल कंपनियों के जरिए 100 करोड़ से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
मामले में ईडी की जांच के बाद दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में एफआईआर दर्ज की गई थी. एफआईआर में झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग के निलंबित चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम, सीए मुकेश मित्तल और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है.

जांच एजेंसियों का आरोप है कि फर्जी पैन कार्ड और फर्जी केवाईसी दस्तावेजों के जरिए कई शेल कंपनियां बनाई गईं. इन्हीं कंपनियों के माध्यम से 100 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की गई. ईडी के मुताबिक बैंक खाते खोलने और लेनदेन को छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था.

वीरेंद्र राम के पिता के खाते में पहुंचे थे करोड़ों रुपये
ईडी जांच में यह भी सामने आया कि श्री खाटू श्याम ट्रेडर्स, अनिल कुमार गोविंद राम ट्रेडर्स और ओम ट्रेडर्स नाम की कंपनियों के जरिए वीरेंद्र राम के पिता गेंदा राम के बैंक खाते में 4.30 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे.

जांच एजेंसी का दावा है कि इसी रकम का इस्तेमाल दिल्ली में जमीन खरीदने के लिए किया गया. जिन कंपनियों के खातों से यह रकम भेजी गई थी, वे खाते कथित तौर पर सचिन गुप्ता के नाम से बनाए गए फर्जी पैन कार्ड के जरिए खोले गए थे. ईडी ने जांच के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया था जिसके बाद आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया.

हवाला के जरिए 5 करोड़ रुपये मिलने की बात स्वीकार करने का दावा
ईडी की पूछताछ में सीए मुकेश मित्तल और उनकी पत्नी से भी सवाल जवाब किए गए थे. जांच एजेंसी के अनुसार मुकेश मित्तल ने स्वीकार किया कि करीब चार से छह महीने पहले वीरेंद्र राम उनसे मिले थे और अपने पिता के खाते में नकदी के बदले रकम निकासी कराने में मदद मांगी थी.

ईडी के मुताबिक मुकेश मित्तल ने ढाई प्रतिशत कमीशन पर यह काम करने की सहमति दी थी. पूछताछ में यह भी सामने आया कि दो महीने के भीतर उन्हें वीरेंद्र राम से कुल 5 करोड़ रुपये मिले थे. जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम घरेलू हवाला नेटवर्क के जरिए अलग अलग किस्तों में भेजी गई थी. हर बार लगभग 25 लाख से 50 लाख रुपये तक की नकद राशि पहुंचाई जाती थी.

टेंडर घोटाले की जांच पर टिकी सबकी नजर
टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े इस मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. ईडी और अन्य जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, शेल कंपनियों और कथित हवाला नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं.

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में और कौन कौन से नाम सामने आते हैं और एजेंसियां किन नए खुलासों तक पहुंचती हैं.
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