Adityapur: नगर निकाय चुनाव के दौरान जनता से किए गए विकास और साफ-सफाई के बड़े-बड़े वादे अब कागजी साबित हो रहे हैं। चुनाव बीते समय बीत चुका है, लेकिन धरातल पर हकीकत कचरे के उन ऊंचे अंबारों के रूप में नजर आ रही है, जो शहर की खूबसूरती और सेहत दोनों को बिगाड़ रहे हैं। वर्तमान में आदित्यपुर नगर निगम के लगभग सभी वार्डों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त है।
मुख्य मार्ग बना डंपिंग यार्ड
शहर का सबसे व्यस्त हिस्सा माना जाने वाला शेरे पंजाब चौक से लेकर रेलवे स्टेशन तक जाने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों गंदगी की चपेट में है। सड़क के किनारों और कॉलोनियों के प्रवेश द्वारों पर जगह-जगह कचरे का ढेर लगा हुआ है। विडंबना यह है कि यह स्थिति किसी एक विशेष वार्ड की नहीं, बल्कि पूरे नगर निगम क्षेत्र की बन चुकी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनाव के समय जो जनप्रतिनिधि गलियों की खाक छानते थे, वे अब जनता की समस्याओं से मुंह मोड़ चुके हैं।
जनप्रतिनिधियों के "निजी खर्च" वाले दावों की खुली पोल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय मतदाताओं को रिझाने के लिए कई प्रत्याशियों ने "अपने निजी फंड" से सफाई और मरम्मत का कार्य करवाकर खूब वाहवाही लूटी थी। लेकिन जीत का सर्टिफिकेट मिलते ही वह सक्रियता गायब हो गई है। अब जब लोग बदहाली पर सवाल पूछते हैं, तो जनप्रतिनिधियों का रटा-रटाया जवाब मिलता है कि "अभी कार्यकाल शुरू हुए कुछ ही समय हुआ है, धीरे-धीरे सुधार होगा।" जनता अब यह पूछ रही है कि यह "धीरे-धीरे" वाला काम आखिर कब तक पूरा होगा?
बीमारियों का साया और प्रशासनिक उदासीनता
नियमित सफाई न होने और नालियों के जाम होने से क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है। कचरे के ढेरों पर पनप रहे मच्छरों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। सरायकेला जिले के प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाते हुए लोगों ने कहा कि यहां का प्रशासन तभी जागता है जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाती है या महामारी फैल जाती है। रोकथाम के लिए समय रहते कदम उठाना प्रशासन की प्राथमिकताओं में नजर नहीं आ रहा है। फिलहाल, शहरवासी अपने जनप्रतिनिधियों को उनके चुनावी वादे याद दिलाते हुए जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की गुहार लगा रहे हैं।