Jharkhand: झारखंड के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर सामने आया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी "मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ओवरसीज स्कॉलरशिप" योजना के तहत सत्र 2026-27 के लिए आवेदन की प्रक्रिया आगामी 14 मई से शुरू होने जा रही है। इस योजना के माध्यम से चयनित 50 मेधावी विद्यार्थियों को दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने के लिए 100 प्रतिशत छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
सीटों और विषयों के दायरे में बड़ी बढ़ोतरी
राज्य सरकार ने इस वर्ष योजना का विस्तार करते हुए लाभार्थियों की संख्या को दोगुना कर दिया है। पिछले वर्षों तक जहां केवल 25 छात्रों को इसका लाभ मिलता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 50 सीटें कर दिया गया है। इसके साथ ही, विषयों की संख्या भी 31 से बढ़ाकर 39 कर दी गई है, ताकि छात्र अपनी रुचि के अनुसार व्यापक क्षेत्रों में शोध और अध्ययन कर सकें। कुल 50 सीटों में से अनुसूचित जनजाति के लिए 20, पिछड़ा वर्ग के लिए 14, अनुसूचित जाति के लिए 10 और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए 6 सीटें आरक्षित की गई हैं।
पात्रता के कड़े मानक और आवेदन की अंतिम तिथि
इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक उम्मीदवार 20 जून 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट www.mgos.jharkhand.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें निर्धारित की गई हैं:
- स्थानीय निवासी: आवेदक का झारखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
- आय सीमा: परिवार की कुल वार्षिक आय 12 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता: स्नातक (Graduation) में कम से कम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए।
- आयु और अनुभव: 1 अप्रैल 2026 तक आवेदक की उम्र 35 वर्ष से अधिक न हो और संबंधित क्षेत्र में कम से कम दो साल का अनुभव आवश्यक है।
- एक परिवार, एक लाभ: एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस छात्रवृत्ति का लाभ उठा सकता है।
ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसे संस्थानों में पढ़ने का मौका
चयनित विद्यार्थियों को ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, इंपीरियल कॉलेज लंदन और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे विश्व के शीर्ष 100 संस्थानों में मास्टर डिग्री या एमफिल करने का गौरव प्राप्त होगा। सबसे खास बात यह है कि इस पढ़ाई का पूरा वित्तीय बोझ राज्य सरकार उठाएगी। इसमें विश्वविद्यालय की ट्यूशन फीस से लेकर रहने का खर्च, हवाई यात्रा का किराया और वीजा शुल्क तक शामिल है। सरकार के इस कदम से राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर बनाने के द्वार खुल गए हैं।