Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है. एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पुलिस की समय पर कार्रवाई न होने की वजह से एक गवाह को अपनी जान गंवानी पड़ी. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने साहिबगंज SP से सीधा सवाल किया कि पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए अदालत के आदेश का इंतजार क्यों करती है? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर फरार आरोपियों को वक्त रहते दबोच लिया जाता, तो गवाह की जान बचाई जा सकती थी.
आम जनता के भरोसे पर उठते सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिसिंग पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि झारखंड पुलिस आम लोगों के बीच विश्वास जगाने में नाकाम साबित हो रही है. अदालत ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए मामलों का जिक्र करते हुए पुलिस की गंभीरता पर सवाल उठाए. इसमें रांची के कोकर से 18 माह की बच्ची के लापता होने और बोकारो में नर कंकाल मिलने जैसे संवेदनशील मामले शामिल हैं. कोर्ट ने याद दिलाया कि 2020 के एक पुराने मामले में भी अदालत की मॉनिटरिंग के बाद ही हत्या का खुलासा हो सका था.
साहिबगंज मामले में पुलिस की विफलता
साहिबगंज के एक मामले में गवाही पूरी होने के बाद तीन आरोपियों ने मिलकर गवाह की हत्या कर दी और फरार हो गए. कोर्ट में जानकारी दी गई कि इनमें से एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन दो अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. कोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए साहिबगंज एसपी को तलब किया और पूछा कि आखिर अपराधी इतने बेखौफ कैसे हैं?
विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
एसपी ने अदालत को बताया कि हाल ही में एक और फरार आरोपी को पकड़ा गया है और बाकी की तलाश जारी है. हालांकि, कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और पुलिस अनुसंधान की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाए. अदालत ने अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है. कोर्ट ने साफ कर दिया कि पुलिस की लापरवाही का सीधा असर जनता के कानून पर भरोसे पर पड़ता है.