AIIMS Delhi Controversy: All India Institute Of Medical Sciences में हाल के दिनों में प्रशासनिक विवाद और डॉक्टरों के लगातार इस्तीफों ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, कई वरिष्ठ डॉक्टर दूसरे संस्थानों का रुख कर रहे हैं। डॉक्टरों का आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर सुधार नहीं हो रहे और काम का माहौल पहले जैसा नहीं रहा। इससे देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है।
मरीजों की भर्ती और डिस्चार्ज प्रक्रिया पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में एम्स दिल्ली के कई विभागों में मरीजों की भर्ती, ट्रांसफर और डिस्चार्ज प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले सामने आए। दावा किया गया कि इन गड़बड़ियों का असर मरीजों की देखभाल और विभागीय ऑडिट तक पड़ा। कार्डियक सर्जन Dr. A.K. Bisoi ने कथित तौर पर इन मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग की थी और तत्कालीन निदेशक Dr. M. Srinivasको भी मामले से अवगत कराया था।
डॉ. बिसोई विवाद और ICC जांच ने बढ़ाया विवाद
डॉ. ए.के. बिसोई से जुड़ा मामला उस समय चर्चा में आया जब कार्डियोलॉजी विभाग की एक नर्स की शिकायत के बाद उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच शुरू हुई। मामला एम्स की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को भेजा गया, लेकिन 23 अक्टूबर 2025 को आई रिपोर्ट में आरोप खारिज कर दिए गए। सूत्रों का दावा है कि नर्स ने मुख्य रूप से कार्य दबाव और ट्रांसफर को लेकर शिकायत की थी। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि प्रशासनिक अनियमितताओं के मुद्दे उठाने के कारण डॉ. बिसोई को विवादों में घेरा गया।
मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी, पारदर्शिता पर सवाल
बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने 31 दिसंबर, 23 फरवरी और 15 अप्रैल को CTVS विभाग में डॉ. बिसोई की भूमिका बनाए रखने और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन इनका पालन नहीं हुआ। इसी बीच 10 मार्च को हुई NCST समीक्षा बैठक की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे सवाल और गहरे हो गए। सूत्रों के मुताबिक, तत्कालीन निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास को नीति आयोग भेजे जाने को भी इसी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।