Jharkhand News: पश्चिम बंगाल भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा घुसपैठियों को देश से बाहर करने के संकल्प ने झारखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. शाह ने बंगाल में सरकार गठन के साथ ही सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासियों की पहचान को अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताया है. बंगाल में इसी मुद्दे पर मिली सफलता से उत्साहित झारखंड भाजपा अब राज्य के पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा और दुमका जैसे जिलों में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ अपने आंदोलन को नई धार देने की तैयारी कर रही है.
आदिवासी जनसंख्या में गिरावट पर बाबूलाल मरांडी ने जताई चिंता
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने घुसपैठ को राज्य की आदिवासी संस्कृति और पहचान के लिए बड़ा खतरा करार दिया है. उन्होंने 1951 से 2011 तक के जनगणना आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में आदिवासियों की जनसंख्या 35.38 प्रतिशत से घटकर 26.20 प्रतिशत रह गई है. मरांडी का तर्क है कि घुसपैठ की वजह से जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिस पर उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग भी की है. उनके अनुसार, यह बदलाव राज्य की सामाजिक संरचना के लिए चिंताजनक है.
वोट बैंक की राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
राजमहल के पूर्व विधायक अनंत ओझा ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि अवैध घुसपैठियों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है. भाजपा का मानना है कि घुसपैठ न केवल स्थानीय संसाधनों पर बोझ है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती है. हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी, लेकिन बंगाल के हालिया घटनाक्रम और अमित शाह के सख्त रुख ने झारखंड भाजपा के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है.
संथाल परगना बनेगा भाजपा के आंदोलन का केंद्र
आगामी दिनों में भाजपा संथाल परगना के चार प्रमुख जिलों में घुसपैठ के मुद्दे पर बड़े जन-आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रही है. पार्टी का उद्देश्य आदिवासियों और मूलवासियों के बीच पैठ बनाकर यह संदेश देना है कि उनकी जमीन और अधिकारों की रक्षा केवल घुसपैठ पर लगाम लगाकर ही संभव है. बंगाल में सरकार गठन के बाद अमित शाह की सक्रियता का असर अब झारखंड की सीमावर्ती राजनीति पर साफ दिखने लगा है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं.