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  • 2026-05-09

Jharkhand News: झारखंड में साइबर फ्रॉड पर वार, एडजुडिकेटिंग ऑफिसर की नियुक्ति के साथ SOP लागू, 5 करोड़ तक के मुआवजे का होगा तुरंत निपटारा

Jharkhand News: झारखंड में अब ऑनलाइन ठगी और डिजिटल लेनदेन से जुड़ी शिकायतों का समाधान तेजी से होगा. राज्य सरकार ने झारखंड हाई कोर्ट के निर्देश पर सूचना तकनीक अधिनियम के तहत सूचना तकनीक एवं ई-गवर्नेंस विभाग के सचिव को एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के रूप में अधिकृत किया है. इस नई व्यवस्था के तहत आईटी एक्ट की धारा 46 के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी लागू कर दी गई है. मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद अब डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम में लोगों का भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है.

5 करोड़ रुपये तक के दावों पर होगी सीधी सुनवाई
इस नई एसओपी का मुख्य केंद्र बिंदु वैसे मामले हैं जिनमें नुकसान या मुआवजे का दावा पांच करोड़ रुपये से अधिक नहीं है. विभाग के सचिव अब कानूनी रूप से सक्षम होकर इन शिकायतों का निपटारा एक पारदर्शी और यूनिफॉर्म तरीके से करेंगे. इससे पहले एडजुडिकेटिंग ऑफिसर की नियुक्ति तो हुई थी, लेकिन एसओपी के अभाव में काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था. अब नागरिकों, व्यवसायियों और सरकारी संस्थाओं को अपनी डिजिटल शिकायतों के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें समय पर न्याय मिल सकेगा.

एफओआरए सिस्टम से होगी मामलों की ऑनलाइन प्रोसेसिंग
केसों के निपटारे के लिए सरकार ने फोरा (FORA: Filing, Objection, Registration, and Allocation) फ्रेमवर्क तैयार किया है. शिकायतकर्ता अपनी शिकायतें मैनुअल या ऑनलाइन माध्यम से निर्धारित फॉर्मेट में दर्ज करा सकते हैं. आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेजों की स्व-अभिप्रमाणित प्रति, एक हस्ताक्षरित शपथपत्र और निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा. शुल्क का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट, चालान या ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है. जांच के बाद शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को एक यूनिक केस नंबर आवंटित किया जाएगा.

हाइब्रिड मोड में होगी सुनवाई और डिजिटल रिकॉर्ड का रखरखाव
इस व्यवस्था के तहत सुनवाई की प्रक्रिया को लचीला बनाया गया है, जहां ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से पक्ष रखे जा सकेंगे. सुनवाई के दौरान दोनों पार्टियां तकनीकी रिकॉर्ड, गवाह और दस्तावेजी सबूत पेश कर सकती हैं, जिनका पूरा लेखा-जोखा डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा. एडजुडिकेटिंग ऑफिसर तकनीकी और विधिक पहलुओं के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञों की मदद भी ले सकेंगे. अंतिम फैसला सुनाने के बाद आदेश की प्रति को विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे.
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