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  • 2026-05-09

Gamharia News: ओवरब्रिज बना, लेकिन इस्तेमाल नहीं! KPS गम्हरिया के बच्चे अब भी जान जोखिम में डालकर पार कर रहे हाईवे

Gamharia: गम्हरिया स्थित केरला पब्लिक स्कूल (KPS) के पास बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार की ओर से हाईवे पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए फुट ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद स्कूल के बच्चे आज भी सीधे व्यस्त सड़क पार करते नजर आ रहे हैं। स्कूल के आसपास लगातार तेज रफ्तार हाइवा, डंपर और भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही होती रहती है, जिससे हर दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा के लिए बना ओवरब्रिज होने के बावजूद उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहा, जो बड़ी चिंता का विषय है।

ओवरब्रिज के बजाय सीधे हाईवे से गुजर रहे बच्चे और अभिभावक
स्कूल परिसर के ठीक बगल में लोहे का फुट ओवरब्रिज मौजूद है, ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सकें। इसके बावजूद छुट्टी के समय बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और कई अभिभावक सीधे सड़क पार करते दिखाई देते हैं। खासकर छोटे बच्चों को भी व्यस्त हाईवे से गुजरते देखा जाता है। इस दौरान सड़क पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार आवाजाही बनी रहती है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता कई मासूम जिंदगियों को खतरे से बचा सकती है।

सड़क के बीच खड़ी हो जाती हैं स्कूल वैन, बढ़ता है खतरा
स्थिति उस समय और गंभीर हो जाती है जब स्कूल छुट्टी के दौरान कई स्कूल वैन और निजी वाहन सड़क के बीचोंबीच खड़े हो जाते हैं। इससे ट्रैफिक प्रभावित होता है और बच्चों के लिए सड़क पार करना और भी खतरनाक हो जाता है। लोगों का कहना है कि कुछ दूरी पर सुरक्षित पाथवे मौजूद होने के बावजूद बच्चों को सीधे हाईवे से पार कराना बेहद लापरवाही भरा कदम है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर आखिर जिम्मेदारी कौन निभाएगा।

स्कूल प्रबंधन और प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे किनारे स्थित स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि बच्चों और अभिभावकों को रोड सेफ्टी के प्रति जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है। छुट्टी के समय विशेष निगरानी और व्यवस्था होनी चाहिए ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से घर पहुंच सकें। हालांकि इस मुद्दे पर स्कूल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

गर्मी की छुट्टियों के बाद क्या बदलेगी स्थिति?
9 मई से स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू हो रही हैं और करीब एक से डेढ़ महीने तक स्कूल बंद रहेंगे। ऐसे में अब यह बड़ा सवाल बन गया है कि छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर क्या फिर वही स्थिति देखने को मिलेगी। क्या बच्चे और अभिभावक फिर से अपनी जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करेंगे, या फिर प्रशासन और ट्रैफिक विभाग इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और जिंदगी से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा है।
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