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  • 2026-05-05

Tata Steel Jamshedpur: वैश्विक संकट के बीच टाटा स्टील की बड़ी उपलब्धि, गैस की किल्लत देख बदला उत्पादन का तरीका, अब हाइड्रोजन-नाइट्रोजन से चलेंगे प्लांट

Tata Steel Jamshedpur: इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी और प्रोपेन गैस की भारी किल्लत हो गई है, जिसका सीधा असर औद्योगिक उत्पादन पर पड़ा है. इस चुनौती से निपटने के लिए टाटा स्टील ने अपने डाउनस्ट्रीम के चार प्लांट यानी सीआरएम बारा, ट्यूब्स डिवीजन, टिनप्लेट और वायर डिवीजन को हाइड्रोजन और नाइट्रोजन के मिश्रण (HNX) से चलाने का सफल प्रयोग शुरू किया है. कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट उज्जवल चक्रवर्ती ने बताया कि गैस की कमी को देखते हुए अप्रैल में शटडाउन लेकर सिस्टम को अपग्रेड किया गया ताकि उत्पादन सुचारू रहे.

कार्बन उत्सर्जन में कमी और नेट जीरो का लक्ष्य
टाटा स्टील की इस नई पहल से स्टील उत्पादन के दौरान होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट आएगी. फर्नेस में अब अमोनिया क्रैकिंग सिस्टम के बजाय सीधे हाइड्रोजन और नाइट्रोजन का उपयोग होगा, जो स्टील को चमकदार रखने और ऑक्सीकरण रोकने में भी सहायक है. यह कदम कंपनी के वर्ष 2045 तक नेट जीरो (शून्य कार्बन उत्सर्जन) के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है. इसके साथ ही, मीरामंडली प्लांट में भी प्रोपेन की कमी के बाद अब कोक ओवन (CO) गैस के उपयोग की तैयारी की जा रही है.

सुरक्षा पर एमडी टीवी नरेंद्रन ने जताई चिंता
टाटा स्टील के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन ने सोमवार को एमडी ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान विभिन्न यूनिट्स में हो रही दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की. अप्रैल माह में जमशेदपुर, कलिंगनगर और मीरामंडली ऑपरेशंस में कुल 12 लोस्ट टाइम इंज्यूरी (LTI) के मामले सामने आए हैं. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए कि उत्पादन के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि शून्य दुर्घटना के लक्ष्य को हासिल किया जा सके.

उत्पादन के क्षेत्र में बनाए नए कीर्तिमान
चुनौतियों के बावजूद टाटा स्टील के विभिन्न विभागों ने अप्रैल में शानदार प्रदर्शन किया है. जमशेदपुर के एलडी-1 और एलडी-3 प्लांट ने हॉट मेटल उत्पादन में नए रिकॉर्ड दर्ज किए हैं. वहीं, रॉ मटेरियल्स डिवीजन ने 39.5 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है और ओडिशा स्थित कलामंग कोल ग्रीन फील्ड माइंस से भी उत्पादन शुरू हो गया है. इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र के खपोली प्लांट में अब सौर ऊर्जा का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है.
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