Chandil: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल न्यू बाईपास पर लगा करीब 50 घंटे लंबा महाजाम आखिरकार गुरुवार सुबह खत्म हो गया। यह जाम इतना भीषण था कि घोड़ानेगी से लेकर नीमडीह के पितकी फाटक तक वाहनों की लंबी कतारें लग गई थीं और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, हाल ही में हुए सड़क हादसे के बाद स्थिति और बिगड़ गई, वहीं नीमडीह स्थित पितकी रेलवे फाटक का बार-बार बंद होना जाम की मुख्य वजह बन गया। लोगों का कहना है कि कई बार फाटक महज 30 मिनट के भीतर 4 से 5 बार बंद हो जा रहा था, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई और लोग घंटों नहीं बल्कि पूरे दिन तक फंसे रहने को मजबूर हो गए।
युवाओं ने संभाली कमान, 5 घंटे की मेहनत रंग लाई
स्थिति को काबू में लाने के लिए गुरुवार तड़के करीब 5 बजे आसपास के गांवों के युवाओं ने खुद मोर्चा संभाल लिया। इस दौरान विस्थापित नेता राकेश रंजन महतो भी मौके पर पहुंचे और भीषण गर्मी के बीच पत्रकारों के साथ सड़क पर उतरकर ट्रैफिक व्यवस्था संभालने लगे। उन्होंने भालूकोचा से लेकर पितकी फाटक तक खुद खड़े होकर वाहनों को नियंत्रित किया, वहीं उनके सहयोगी कृष्णा कालिंदी भी लगातार उनके साथ जुटे रहे। करीब 5 घंटे तक लगातार प्रयास और कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार जाम पूरी तरह खत्म हो गया और सड़क पर यातायात सामान्य हो सका।
प्रशासन और रेलवे व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में जहां युवाओं की एकजुटता और सक्रियता ने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया, वहीं इसने प्रशासन और रेलवे व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पितकी रेलवे फाटक की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में चांडिल न्यू बाईपास पर इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न हो सकती है। लोगों ने मांग की है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता को इस तरह की परेशानियों से राहत मिल सके।