Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण (NHAI) द्वारा हजारीबाग-बरही सड़क (एनएच-33) के किनारे 20 हजार पौधे लगाए जाने के दावे पर गंभीर रुख अपनाया है. अदालत ने हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष सह रीजनल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (RCCF) को स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
अदालत ने मामले में एनएचएआई के क्षेत्रीय पदाधिकारी से भी पेड़ों के संरक्षण और अधिकतम पौधरोपण के लिए अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 25 जून को निर्धारित की गई है.
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने गुरुवार को स्वतः संज्ञान लिए गए मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
सुनवाई के दौरान एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने डालसा हजारीबाग के सचिव की रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि पौधों की गिनती में त्रुटि हुई है. हालांकि अदालत ने उनकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
सुनवाई के समय प्रोजेक्ट डायरेक्टर और आरसीसीएफ रांची व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए. इससे पहले अदालत ने डालसा सचिव से एनएचएआई के 20 हजार पौधे लगाए जाने के दावे की जांच कर रिपोर्ट मांगी थी.
डालसा सचिव ने अपनी रिपोर्ट में इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि कई पौधे पानी और देखभाल के अभाव में सूख चुके हैं, जबकि वास्तविक संख्या दावे से कम प्रतीत होती है. इसी रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोबारा विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं.