Ranchi News: राजधानी रांची और इसके आसपास के इलाकों में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति ठप होने से हाहाकार मच गया है. हालात इतने खराब हैं कि शहर के बाहरी इलाकों में पेट्रोल पंपों ने बिक्री पर सीमा तय कर दी है. मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई जगहों पर दोपहिया और चार पहिया वाहनों को 500 रुपये से ज्यादा का पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है. वहीं, डीजल की किल्लत का सबसे बुरा असर भारी वाहनों पर पड़ा है. ट्रक ड्राइवरों का कहना है कि 50 लीटर की जरूरत होने पर उन्हें बमुश्किल 30 लीटर डीजल दिया जा रहा है. आपूर्ति में इस भारी असंतुलन की वजह से शहरवासी अनिश्चितता के बीच घंटों कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं.
कंपनियों ने की 20 प्रतिशत की कटौती, टैंकरों का इंतजार
पेट्रोल पंप संचालकों का दावा है कि तेल कंपनियों ने आपूर्ति में करीब 20 प्रतिशत की कटौती कर दी है. संचालकों का आरोप है कि डिमांड नोट भेजने और भुगतान के बावजूद कंपनियों की ओर से तेल के टैंकर समय पर नहीं भेजे जा रहे हैं. स्टॉक तेजी से खत्म होने की वजह से पंपों को मजबूरी में लिमिट लगानी पड़ रही है. हालांकि, शहर के भीतर और बाहर की तस्वीरों में विरोधाभास भी दिख रहा है. जहां आउटर इलाकों में तेल खत्म है, वहीं शहर के कुछ पंपों पर नियम तोड़कर धड़ल्ले से गैलन में तेल भरा जा रहा है, जिससे वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.
माल ढुलाई और आवश्यक सेवाओं पर मंडराया खतरा
ईंधन के इस संकट ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को हिला कर रख दिया है. डीजल की कमी के कारण माल ढुलाई करने वाले ट्रकों के पहिए थमने लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की आशंका है. इसके अलावा ऑटो, बस और टैक्सी सेवाओं पर भी भारी दबाव देखा जा रहा है. निर्माण कार्यों और छोटे उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के लिए भी डीजल नहीं मिल पा रहा है. यदि तेल कंपनियों के साथ समन्वय कर आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो आपातकालीन सेवाओं के लिए भी ईंधन का संकट खड़ा हो सकता है.
मांग और लॉजिस्टिक बाधाओं में उलझा प्रबंधन
फिलहाल इस संकट के पीछे आधिकारिक तौर पर किसी बड़े तकनीकी खराबी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि टैंकरों की अनियमित सप्लाई और लॉजिस्टिक बाधाएं इसकी मुख्य वजह हैं. मांग में अचानक आई वृद्धि और वितरण श्रृंखला (Distribution Chain) में प्रबंधन की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. शहर के कुछ पंपों पर पेट्रोल 50 लीटर तक सीमित करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन इसके बावजूद कई जगह नियमों का उल्लंघन हो रहा है. फिलहाल, रांची के लोग इस उम्मीद में हैं कि तेल कंपनियां और प्रशासन मिलकर इस ईंधन लॉकडाउन को जल्द खत्म करेंगे.