Jamshedpur News: जमशेदपुर में ट्रैफिक चेकपोस्ट के वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने पर जेल की चेतावनी से जुड़ा कथित आदेश अब गंभीर विवाद का कारण बन गया है। इस मामले को लेकर भाजपा के पूर्व जिला प्रवक्ता सह आरटीआई कार्यकर्ता अंकित आनंद ने झारखंड विधानसभा की प्रत्यायुक्त विधान समिति के सभापति को आवेदन देकर जांच की मांग की है।
संवैधानिक अधिकारों पर उठे सवाल
अंकित आनंद ने कहा कि बिना स्पष्ट अधिसूचना और कानूनी आधार के इस तरह की चेतावनी देना नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। उन्होंने पूछा कि क्या यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) का उल्लंघन नहीं है और यदि वीडियो बनाना अपराध है तो किन धाराओं में इसे दंडनीय माना गया है।
कानूनी वैधता और प्रक्रिया पर सवाल
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह आदेश विधिवत अधिसूचित है और क्या इसे प्रत्यायुक्त विधान के तहत विधानसभा में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही “इमेज खराब होने” के आधार पर कार्रवाई को उन्होंने न्यायसंगत नहीं बताया और इसे प्रशासनिक जवाबदेही से ध्यान भटकाने की कोशिश कहा।
सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग
अंकित आनंद ने राज्य सरकार से मांग की कि यदि यह आदेश वैध है तो उसका कानूनी आधार सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा ऐसी चेतावनियों का तत्काल खंडन किया जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और नागरिक अधिकार सर्वोपरि हैं और इन्हें कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं है।