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  • 2026-04-21

Jharkhand News: म्यूटेशन लटकाया तो खैर नहीं, सीएम हेमंत सोरेन का गढ़वा डीसी को निर्देश, लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज

Jharkhand News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जमीन म्यूटेशन के लंबित मामलों को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है. यह मामला तब चर्चा में आया जब गढ़वा के मेराल अंचल के निवासी शिवम चौबे ने सोशल मीडिया (X) पर अपनी पीड़ा साझा की. पीड़ित ने बताया कि दो महीने बीत जाने के बाद भी उनका म्यूटेशन पेंडिंग है और कर्मचारी फोन तक नहीं उठा रहे हैं. इस बेबसी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लिया और गढ़वा उपायुक्त (DC) को सीधे आदेश जारी किए कि "लटकाने और भटकाने" वाले कर्मियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

भ्रष्टाचार और हीलाहवाली पर जीरो टॉलरेंस
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकार की जनहितकारी सेवाओं में बाधा डालने वाले बिचौलिए और लापरवाह कर्मचारी कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. सीएम ने गढ़वा प्रशासन को निर्देश दिया है कि अंचल कार्यालयों में लंबित म्यूटेशन के मामलों की गहन समीक्षा की जाए. उन्होंने कहा कि अंचल अधिकारी और कर्मचारी बिना ठोस कारण के आवेदनों पर आपत्ति लगाकर उन्हें लंबित न रखें. इस सख्त रुख का उद्देश्य सरकारी दफ्तरों में व्याप्त लालफीताशाही को खत्म करना और आम नागरिकों को उनके अधिकारों का लाभ समय पर दिलाना है.

सीएम के निर्देश के बाद हरकत में आया गढ़वा प्रशासन
मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद गढ़वा जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है. मेराल अंचल सहित जिले के सभी अंचलों में लंबित म्यूटेशन आवेदनों की सूची तैयार की जा रही है. संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिवम चौबे के मामले की जांच कर तत्काल समाधान निकालें. जिला प्रशासन अब उन बिंदुओं की जांच कर रहा है कि आखिर क्यों छोटे-छोटे कार्यों के लिए आवेदकों को चक्कर कटवाए जा रहे हैं. अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि जांच में दोषी पाए गए, तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ उनके सेवा रिकॉर्ड पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

बिचौलियों के सिंडिकेट पर सरकार की पैनी नजर
झारखंड में जमीन से जुड़े मामलों में अक्सर बिचौलियों के सक्रिय होने की शिकायतें मिलती रही हैं. मुख्यमंत्री के इस "ऑन द स्पॉट" एक्शन से भ्रष्ट तंत्र के बीच खलबली मच गई है. सरकार का लक्ष्य म्यूटेशन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है. जानकारों का मानना है कि यदि इसी तरह मुख्यमंत्री सीधे तौर पर जिलों की कार्यप्रणाली की निगरानी करेंगे, तो इससे सरकारी मशीनरी की जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता को दफ्तरों की भागदौड़ से मुक्ति मिल सकेगी.
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