Jamshedpur: झारखंड में सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद पूर्वी सिंहभूम जिले में प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस घटना के बाद न सिर्फ जांच प्रक्रिया तेज हुई है, बल्कि सरकारी कार्यालयों के कामकाज के तरीके में भी व्यापक परिवर्तन किया गया है। अब लेखापालों की कार्यशैली पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और भुगतान प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त और तकनीकी रूप से नियंत्रित किया गया है। प्रशासन ने साफ तौर पर यह संदेश दिया है कि अगर भुगतान में देरी होती है तो वह स्वीकार्य है, लेकिन किसी भी तरह की गलती अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लेखापालों पर सख्त निगरानी, डिजिटल सिस्टम पर नियंत्रण
जिला प्रशासन ने अकाउंटेंट्स के कामकाज पर विशेष नियंत्रण लागू कर दिया है। डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) के उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं, जिसके तहत अब किसी भी अधिकारी का डिजिटल सिग्नेचर केवल उसकी मौजूदगी में ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके साथ ही लॉगिन पासवर्ड को हर महीने बदलना अनिवार्य किया गया है और बाहरी सिस्टम से एक्सेस पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी सरकारी खातों की केवाईसी और सत्यापन प्रक्रिया को दोबारा कराया जा रहा है, ताकि मृत कर्मचारियों या फर्जी वेंडरों के खातों में भुगतान की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
भुगतान प्रक्रिया पर पड़ा असर, बढ़ी जांच और देरी
इन सख्त व्यवस्थाओं का असर अब भुगतान प्रक्रिया पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वेतन, एरियर, टीए/डीए और अन्य दावों के भुगतान में ट्रेजरी की ओर से बार-बार पूछताछ और जांच के कारण क्लीयरेंस में देरी हो रही है। पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़ी फाइलों में हर दस्तावेज का गहन मिलान किया जा रहा है, जिससे औसतन 15 से 20 दिन की अतिरिक्त देरी हो रही है। पुलिस, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़े बड़े भुगतान वाले बिलों पर कोषागार द्वारा सीधे निगरानी रखी जा रही है, जिससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी लेकिन समय लेने वाली बन गई है।
तकनीकी बदलाव के जरिए ‘जीरो एरर’ पर फोकस
प्रशासन अब मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए तकनीकी व्यवस्था को और मजबूत कर रहा है। इसके तहत पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) को पूरी तरह अनिवार्य बनाया जा रहा है। इस सिस्टम में किसी भी प्रकार का मैन्युअल बदलाव संभव नहीं है, क्योंकि डेटा सीधे मुख्यालय से जुड़ा होता है। इससे खातों में गड़बड़ी या हेरफेर की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाती है।
संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत सूचना देने के निर्देश
वरीय अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी अकाउंटेंट्स किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दें। प्रशासन का फोकस अब पूरी तरह ‘जीरो एरर’ नीति पर है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की गुंजाइश न रहे।