Jharkhand News: झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झामुमो ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर रांची में दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. 21 और 22 अप्रैल को होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद मौजूद रहेंगे और राज्य के सभी जिलों से आए पदाधिकारियों के साथ भविष्य की रणनीति पर मंथन करेंगे. पार्टी का मुख्य उद्देश्य बूथ लेवल एजेंटों (BLA) को सक्रिय करना है, ताकि जमीनी स्तर पर मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित हो सके और किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से न हटने पाए.
पड़ोसी राज्यों के अनुभवों से सतर्क हुई पार्टी
झामुमो इस बार बिहार और पश्चिम बंगाल के हालिया अनुभवों से सीख लेते हुए सतर्कता बरत रहा है. पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो झारखंड में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं, जैसा कि पड़ोसी राज्यों में देखा गया था. कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे भारत निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं के प्रति लोगों को जागरूक करें और यह सुनिश्चित करें कि समाज के हर वर्ग, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की डिजिटल और कागजी पहचान सुरक्षित रहे.
अधिकारों और अस्तित्व की लड़ाई का आह्वान
झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने इस पूरी प्रक्रिया को केवल प्रशासनिक कार्य न मानकर इसे “सम्मान की लड़ाई” करार दिया है. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बिहार में जिस तरह लाखों राशन कार्ड रद्द किए गए, वह गरीबों और आदिवासियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने की एक सुनियोजित साजिश है. पांडेय के अनुसार, मतदाता सूची से एक नाम हटने का सीधा मतलब उस परिवार की पेंशन, राशन और भविष्य की सुविधाओं पर संकट खड़ा करना है.
जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सौंपी जिम्मेदारी
पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को मतदान के अधिकार का महत्व समझाएं. झामुमो का मानना है कि भाजपा की नीतियां गरीब तबकों को कमजोर करने वाली हैं, इसलिए पार्टी इसे एक बड़े राजनीतिक आंदोलन के रूप में देख रही है. आगामी दो दिनों की बैठक में जिलावार फीडबैक लिया जाएगा और एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी ताकि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिहीन और समावेशी बनी रहे.