National News: सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्ग सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राष्ट्रव्यापी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. जस्टिस जेके माहेश्वरी और अतुल चंदुरकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर सुरक्षित आवागमन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत "जीवन के अधिकार" का एक अभिन्न अंग है. कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश दो भीषण सड़क दुर्घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेने के बाद दिया. बेंच ने चेतावनी दी है कि प्रशासनिक गलतियों या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण एक्सप्रेसवे "खतरे के गलियारे" में नहीं बदलने चाहिए.
अवैध पार्किंग पर रोक और ई-चालान से निगरानी
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कोई भी भारी या कमर्शियल वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग के कैरिजवे या पक्के शोल्डर पर पार्क नहीं होगा. वाहन केवल निर्धारित “ले-बाय” या “बे” में ही रुक सकेंगे. इसे सख्ती से लागू करने के लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS), GPS आधारित फोटोग्राफिक साक्ष्य और ई-चालान प्रणाली का उपयोग किया जाएगा. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), NHAI और राज्य पुलिस को 60 दिनों के भीतर इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है. जिला मजिस्ट्रेटों को नियमित पेट्रोलिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है.
अतिक्रमण पर प्रहार: ढाबों और अवैध निर्माणों पर चलेगी कैंची
एक कड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्गों के अधिकार क्षेत्र (Right of Way) में स्थित सभी अनधिकृत ढाबों और कमर्शियल स्ट्रक्चर को तत्काल हटाने का आदेश दिया है. नए निर्माणों पर तुरंत रोक लगा दी गई है और मौजूदा अवैध ढाबों को हटाने के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय की गई है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि NHAI या PWD की अनुमति के बिना किसी भी हाईवे सेफ्टी ज़ोन में लाइसेंस जारी न किया जाए. साथ ही, अगले 30 दिनों के भीतर सभी मौजूदा लाइसेंसों की समीक्षा करने का आदेश भी दिया गया है.
टास्क फोर्स का गठन और दुर्घटना संभावित “ब्लैकस्पॉट” पर सुधार
अदालत ने प्रत्येक जिले में 15 दिनों के भीतर “हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स” बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें पुलिस, प्रशासन और NHAI के अधिकारी शामिल होंगे. कोर्ट ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि नेशनल हाईवे देश के सड़क नेटवर्क का केवल 2% हिस्सा हैं, लेकिन 30% मौतें इन्हीं पर होती हैं. इसे कम करने के लिए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Blackspots) पर लाइटिंग सुधारने, नियमित अंतराल पर लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस तैनात करने और ट्रकों के लिए बेहतर ठहराव की सुविधा सुनिश्चित करने को कहा गया है. केंद्र सरकार को 75 दिनों के भीतर इस पर कम्प्लायंस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी.