Saranda Naxal Operation: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा के जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान में तैनात असम निवासी जवान के. आनंद सिंह की मलेरिया के कारण मृत्यु हो गई. गश्ती के दौरान उन्हें तेज बुखार आया था, जिसके बाद प्राथमिक जांच में मलेरिया की पुष्टि हुई. स्थिति गंभीर होने पर विभाग ने उन्हें तत्काल एयरलिफ्ट कर रांची के अस्पताल में भर्ती कराया. डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद, मल्टीपल ऑर्गन फेलियर (अंगों के काम बंद करने) के कारण उन्होंने शनिवार देर रात अंतिम सांस ली. इस दुखद समाचार के बाद पुलिस महकमे और उनकी बटालियन में शोक की लहर है.
मलेरिया जोन बना चुनौती, कई अन्य जवान भी बीमार
सारंडा का जंगल अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण “मलेरिया जोन” माना जाता है, जहां मानसून के बाद मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ जाता है. सूत्रों के अनुसार, के. आनंद सिंह के अलावा सात से आठ अन्य जवान भी वर्तमान में तेज बुखार की चपेट में हैं, जिन्हें बेहतर उपचार के लिए रांची भेजा गया है. दुर्गम क्षेत्रों में लगातार कैंपिंग और गश्त के कारण जवानों के लिए मच्छर जनित रोगों से बचना एक बड़ी चुनौती बन गया है. अब बारूदी सुरंगों के साथ-साथ मलेरिया भी सुरक्षा बलों के लिए एक बड़े खतरे के रूप में उभर रहा है.
स्वास्थ्य जांच के निर्देश और एहतियाती कदम
जवान की मृत्यु के बाद वरीय अधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है और उनके पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ असम भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अभियान में शामिल सभी जवानों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच के निर्देश दिए गए हैं. फील्ड में तैनात जवानों को मच्छरदानी, कीटनाशक और मच्छर भगाने वाली क्रीम का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है. विभाग ने मेडिकल किट में मलेरिया रोधी दवाओं का स्टॉक बढ़ाने के साथ-साथ जवानों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प दोहराया है.
कठिन परिस्थितियों में दोहरे मोर्चे पर लड़ रहे जवान
सारंडा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में जवानों की यह शहादत उनके संघर्ष की एक अलग कहानी बयां करती है. यहां उन्हें केवल माओवादियों की गोलियों या आईईडी (IED) के खतरों से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के कड़े मिजाज और जानलेवा बीमारियों से भी दो-दो हाथ करने पड़ते हैं. दुर्गम जंगल और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच सुरक्षा बलों का यह जज्बा काबिले तारीफ है, हालांकि बीमारियां अब उनके अभियान में बड़ी बाधा बन रही हैं.