Promotion Delay: झारखंड बिजली वितरण निगम में प्रशासनिक नैतिकता और नियमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. पिछले वर्ष 25 जनवरी को निगम में कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से कार्यकारी निदेशक, महाप्रबंधक और उप महाप्रबंधक श्रेणियों में कुल 129 नए पदों का सृजन किया गया था. मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इन पदों पर प्रोन्नति (Promotion) की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है. इंजीनियरों का आरोप है कि पद सृजित होने के बावजूद प्रबंधन केवल कागजी खानापूर्ति कर रहा है, जिससे योग्य अधिकारियों में भारी असंतोष है.
रांची में जमे “खासमखास” इंजीनियर, तबादला नीति दरकिनार
निगम की कार्यप्रणाली में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि तबादला नीति का पालन केवल साधारण कर्मचारियों के लिए हो रहा है. रसूखदार इंजीनियर पिछले 15 वर्षों से लगातार रांची के प्राइम डिविजनों में जमे हुए हैं. एक ओर राजधानी में “मलाईदार” पदों पर रसूख हावी है, वहीं दूसरी ओर राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में इंजीनियरों की भारी कमी बनी हुई है. तकनीकी पदों पर प्रशासनिक तैनाती के भी मामले सामने आए हैं, जहां नियमों को ताक पर रखकर कार्यपालक अभियंता को उप महाप्रबंधक (HR) जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई है.
कार्य संस्कृति पर असर और बिजली व्यवस्था पर खतरे के संकेत
प्रबंधन द्वारा चहेते अधिकारियों को प्राथमिकता देने और काबिलियत को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति ने निगम की कार्य संस्कृति को बुरी तरह प्रभावित किया है. सैकड़ों इंजीनियर अपनी जायज प्रोन्नति के लिए फाइलों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि “खासमखास” अधिकारियों के लिए नियम शिथिल कर दिए गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रोन्नति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और लंबे समय से एक ही जगह जमे अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं हुआ, तो इसका सीधा नकारात्मक असर राज्य की बिजली आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाओं पर पड़ सकता है.