स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्किंग संवेदकों द्वारा जानबूझकर व्हाइट लाइन के बाहर सड़क पर तीन-चार कतारों में वाहनों की पार्किंग कराई जाती है, जिससे सड़कों का आधा हिस्सा पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाता है। यह स्थिति आए दिन जाम, सड़क हादसों और पैदल चलने वालों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
हालांकि सड़क किनारे स्पष्ट रूप से "नो पार्किंग" के बोर्ड लगे हैं, फिर भी संवेदक के कर्मचारी जबरन वाहन चालकों से शुल्क वसूलते हैं। जो वाहन चालक विरोध करते हैं, उन्हें धमकाया जाता है। स्थानीय दुकानदारों और वाहन चालकों की शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है।
पीएम मॉल के पास चाय बेचने वाले मोनू सिंह बताते हैं, “हर शाम पार्किंग वाले मेरी दुकान तक गाड़ियां खड़ी करवा देते हैं, जिससे ग्राहक तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है।” वहीं वाहन मालिक राजेश कुमार का कहना है, “मैं मॉल के बाहर गाड़ी पार्क करता हूं, लेकिन जबरन मुझसे पैसा लिया जाता है, जैसे ये भी कोई वैध पार्किंग हो।”
जिला प्रशासन और JNAC ने शहरवासियों को ट्रैफिक जागरूकता अभियान के माध्यम से केवल कागजों पर सुरक्षा का भरोसा दिलाया है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल उलट हैं। जिन अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी, वे संवेदकों के नियमों और शर्तों की जानकारी तक सार्वजनिक नहीं कर पाए हैं।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जिला प्रशासन और JNAC अविलंब इन अवैध पार्किंग गतिविधियों पर कार्रवाई करें और दोषी संवेदकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही सड़कों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि यातायात सुचारु रहे और लोगों की जान जोखिम में न पड़े।
आपको बता दे कि पार्किंग संवेदकों को JNAC के साथ हुए अनुबंध के तहत केवल निर्धारित क्षेत्र में ही वाहनों की पार्किंग करानी होती है और केवल उन्हीं वाहनों से शुल्क वसूलने की अनुमति होती है जो अधिकृत पार्किंग क्षेत्र के भीतर खड़े हों। व्हाइट लाइन के बाहर या "नो पार्किंग" जोन में खड़े वाहनों से जबरन पैसा वसूलना पूरी तरह से गैरकानूनी है। संवेदक और उनके कर्मचारी किसी भी परिस्थिति में बलपूर्वक शुल्क नहीं ले सकते और नियमों का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
जब तक प्रशासन और JNAC इन समस्याओं पर गंभीरता नहीं दिखाएंगे, तब तक शहर की सड़कें संवेदकों की मनमानी की शिकार बनी रहेंगी और आम लोग जाम और हादसों से जूझते रहेंगे।