National News: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों के करीब आते ही भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने अभूतपूर्व कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” पर सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का नाम लेते हुए "स्ट्रेट टॉक" (दो-टूक बात) शीर्षक से चेतावनी जारी की है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव भय, हिंसा, धमकी और प्रलोभन से मुक्त होंगे. आयोग ने पहली बार सार्वजनिक रूप से किसी राजनीतिक दल का नाम लेकर बूथ और सोर्स जामिंग जैसे कृत्यों को बर्दाश्त न करने की बात कही है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है.
वोटर लिस्ट में 61 लाख नामों की कटौती पर संग्राम, दिल्ली में तीखी बहस
यह विवाद तब और गहरा गया जब डेरेक ओ”ब्रायन के नेतृत्व में टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की. टीएमसी का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर जानबूझकर करीब 61 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जिससे मतदाता संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई है. पार्टी ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया है. दूसरी ओर, आयोग ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और तकनीकी शुद्धता के आधार पर की गई है.
केजरीवाल ने साधा निशाना, विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
चुनाव आयोग द्वारा सीधे तौर पर एक पार्टी को टारगेट करने वाली भाषा पर विपक्ष ने भी हमला बोला है. आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इसे "अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए कहा कि अब यह खुलेआम दिख रहा है कि संवैधानिक संस्थाएं किसके दबाव में हैं. बंगाल में इस बार चुनाव केवल दो चरणों में (23 और 29 अप्रैल) संपन्न होंगे और नतीजे 4 मई को आएंगे. आयोग ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती पेशेवर तरीके से की जाएगी और किसी भी तरह की चुनावी गड़बड़ी करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.