Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-04-08

Odisha Minning Protest: रायगढ़ा में सिजीमाली बॉक्साइट खदान को लेकर हिंसा, आदिवासी-पुलिस झड़प में 50 घायल

Odisha Minning Protest: ओडिशा के रायगढ़ा में सिजीमाली बॉक्साइट खदान को लेकर चल रहा विरोध अचानक हिंसक हो गया. आधी रात के बाद शुरू हुई इस झड़प में हालात इतने बिगड़ गए कि करीब 50 लोग घायल हो गए, जिनमें 40 पुलिसकर्मी शामिल हैं. घटना ने एक बार फिर विकास परियोजनाओं और आदिवासी अधिकारों के बीच टकराव को सुर्खियों में ला दिया है.
तड़के 3 बजे भड़की हिंसा,सड़क निर्माण सुरक्षा के दौरान बेकाबू हुई स्थिति
रायगढ़ा जिले के सागाबारी गांव में तड़के करीब 3 बजे यह पूरा घटनाक्रम शुरू हुआ. पुलिस बल "Vedanta Limited" की प्रस्तावित बॉक्साइट खदान के लिए सड़क निर्माण कार्य को सुरक्षा देने पहुंचा था. मौके पर पहले से पहरा दे रहे आदिवासी ग्रामीणों ने पुलिस को गांव में घुसने से रोक दिया. शुरुआती बातचीत के बाद हालात तेजी से बिगड़े. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भीड़ ने पुलिस पर पत्थर, ईटों के साथ तलवार और कुल्हाड़ी जैसे धारदार हथियारों से हमला कर दिया. इस अचानक हुई हिंसा में करीब 50 लोग घायल हुए, जिनमें 40 पुलिसकर्मी शामिल हैं. अतिरिक्त महानिदेशक संजय कुमार के मुताबिक, 10 पुलिसकर्मियों के सिर में गंभीर चोटें आई, जिन्हें तुरंत रायगढ़ा जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया.

क्यों सुलगा विवाद, 1,549 हेक्टेयर में फैली खदान परियोजना बना कारण
सिजीमाली बॉक्साइट खदान परियोजना करीब 1,549 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है. राज्य सरकार ने मार्च 2023 में इस परियोजना को 50 साल के लिए Vedanta Limited को सौंप दिया है. स्थानीय आदिवासी और दलित समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाला "मां माटी माली सुरक्षा मंच" इस परियोजना का लगातार विरोध कर रहा है. उनका कहना है कि सिजीमाली की पहाड़ियां उनके आराध्य देव "तिज राजा" का पवित्र स्थान हैं. ग्रामीणों को आशंका है कि खनन शुरू होने से जल स्रोत सूख सकते हैं, जंगल नष्ट हो सकते हैं और उनकी पारंपरिक आजीविका खत्म हो जाएगी. उनके लिए यह आंदोलन केवल जमीन का नहीं, बल्कि अपनी पहचान और संस्कृति को बचाने की लड़ाई है.

प्रशासन का दावा बनाम कार्यकर्ताओं के आरोप, एकतरफा कार्रवाई पर उठे सवाल
घटना के बाद प्रशासन ने इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था की स्थिति बता रहा है. वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं. समाजवादी जन परिषद से जुड़े अफलातून जैसे नेताओं का कहना है कि पुलिस और सीआरपीएफ ने कण्टामाल गांव में "बर्बर दमन" किया. उनका आरोप है कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के साथ मारपीट की और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मीडिया में दिखाई जा रही हिंसा की तस्वीर एकतरफा है, जबकि ग्रामीण खुद को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी बता रहे हैं.

तनाव बरकरार, बातचीत से समाधान की कोशिश की जा रही 
फिलहाल सागाबारी और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है. Kulkarni Ashutosh C खुद मौके पर मौजूद हैं और आदिवासी नेताओं से बातचीत कर हालात सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं. आंदोलनकारी साफ तौर पर कह रहे हैं कि पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्र में उनकी सहमति के बिना कोई भी परियोजना लागू नहीं की जा सकती.

रायगढ़ा की यह घटना सिर्फ एक झड़प नहीं, बल्कि उस बड़े संघर्ष का प्रतीक है जहां एक तरफ विकास परियोजनाएं हैं और दूसरी तरफ आदिवासी समाज का जल, जंगल और जमीन से जुड़ा अस्तित्व. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संवाद के जरिए इस टकराव का हल निकलेगा या यह संघर्ष और गहराएगा.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !