जमशेदपुर, 2 अप्रैल 2026: Tata Steel Foundation ने वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे के अवसर पर सबल-ज्ञानोदय केंद्र में एक अनूठी पहल करते हुए “डे विदाउट डिमांड्स” कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य न्यूरोडाइवर्स बच्चों के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार करना था, जहां वे बिना किसी दबाव, अपेक्षा या निर्देश के अपनी सहजता के साथ समय बिता सकें।
बच्चों के अनुसार ढाला गया माहौल
इस कार्यक्रम की खासियत यह रही कि इसमें पारंपरिक गतिविधियों के बजाय बच्चों की जरूरतों को प्राथमिकता दी गई। हॉल को खास तौर पर मैट, सॉफ्ट प्ले मटेरियल और खुले स्थानों से सजाया गया, ताकि बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार बैठ सकें, लेट सकें या स्वतंत्र रूप से घूम सकें। साथ ही, हल्का वाद्य संगीत वातावरण को शांत और संतुलित बनाए रखने में सहायक रहा।
बिना निर्देश के रचनात्मक अभिव्यक्ति
बच्चों को कागज, रंग और मिट्टी जैसे रचनात्मक सामग्री उपलब्ध कराई गई, लेकिन किसी भी तरह का निर्देश या लक्ष्य नहीं दिया गया। यहां बच्चों की अभिव्यक्ति को हर रूप में स्वीकार किया गया—चाहे वह बिना बोले संवाद हो, शांत रहना हो या अपने तरीके से खेलना।
शिक्षकों और अभिभावकों की भी रही भागीदारी
इस दौरान शिक्षकों ने पारंपरिक भूमिका से हटकर बच्चों के साथ सहायक की भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों के व्यवहार को समझते हुए उनके अनुसार प्रतिक्रिया दी। वहीं, अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया को देखने के लिए आमंत्रित किया गया, जिससे वे अपने बच्चों की भावनात्मक और व्यवहारिक जरूरतों को बेहतर समझ सकें।
समावेशी सोच को मिला नया आयाम
कार्यक्रम के दौरान टाटा स्टील फाउंडेशन के स्किल डेवलपमेंट, डिसएबिलिटी और स्पोर्ट्स विभाग के प्रमुख कैप्टन अमिताभ ने कहा कि समावेशन का मतलब बच्चों को सिस्टम के अनुसार ढालना नहीं, बल्कि सिस्टम को बच्चों के अनुसार बदलना है।
उन्होंने कहा कि “डे विदाउट डिमांड्स” के जरिए यह देखा गया कि जब बच्चों पर किसी प्रकार का दबाव नहीं होता, तो वे अधिक सहज, शांत और स्वाभाविक रूप से जुड़ते हैं।
न्यूरोडाइवर्सिटी को बढ़ावा देने की पहल
टाटा स्टील फाउंडेशन की यह पहल दर्शाती है कि संस्था न केवल शिक्षा, बल्कि बच्चों के भावनात्मक और मानसिक विकास को भी प्राथमिकता देती है। ‘सबल’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से फाउंडेशन लगातार ऐसे रास्ते तैयार कर रहा है, जहां हर बच्चा अपने तरीके से सीख और विकसित हो सके।