Middle East War Impact: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने एक बेहद महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक की है. इस हाईलेवल मीटिंग में ग्रुप की 30 से अधिक बड़ी कंपनियों के सीईओ (CEOs) और प्रबंध निदेशकों (MDs) ने शिरकत की, जिसमें जमशेदपुर स्थित कई कंपनियों के मुखिया भी शामिल थे. बैठक में चेयरमैन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हो रही है. कच्चे माल की किल्लत और कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों के कारण कंपनियों की इनपुट लागत (लागत मूल्य) बढ़ेगी, जिसका सीधा असर बाजार की मांग और कंपनियों के मुनाफे (Profit Margins) पर पड़ना तय है.
नए प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक लगाने और कैश बचाने की सख्त हिदायत
चेयरमैन चंद्रशेखरन ने सभी कंपनियों के आला अधिकारियों को “कैश मैनेजमेंट” (नकदी प्रबंधन) पर विशेष ध्यान देने की कड़क सलाह दी है. उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा अनिश्चितता के दौर में नए प्रोजेक्ट शुरू करने में भारी सतर्कता बरती जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी समय सीमा की दोबारा समीक्षा की जाए. सप्लाई में देरी के कारण कई कंपनियों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और विस्तार योजनाओं में विलंब संभव है. बैठक में यह कड़वा सच भी सामने आया कि लॉजिस्टिक्स लागत, मुद्रा में उतार-चढ़ाव (Currency Fluctuation) और संसाधनों की कमी के चलते कारोबारी लागत और बढ़ेगी.
पश्चिम एशिया में फंसे 10 हजार कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
सप्लाई चेन और मुनाफे की चिंता के बीच टाटा समूह ने अपनी सबसे बड़ी ताकत, यानी अपने कर्मचारियों के प्रति अपनी संवेदनशीलता भी दिखाई है. चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में कार्यरत समूह के करीब 10 हजार कर्मचारियों की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है. वोल्टास, टीसीएस, इंडियन होटल्स और टाइटन जैसी दिग्गज कंपनियों के कर्मचारियों की सुरक्षित घर वापसी के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है. एयर इंडिया के विमानों के माध्यम से कर्मचारियों और उनके परिवारों को वापस लाने में मदद दी गई है. साथ ही कतर और सऊदी अरब में भी वीजा और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया गया है.
कर्मचारियों के मानसिक तनाव और भविष्य की तैयारियों पर जोर
चेयरमैन ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि वे युद्ध क्षेत्र में फंसे कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके मानसिक तनाव को भी पूरी गंभीरता से लें. उन्होंने संकट काल में कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ का पूरा ख्याल रखने की बात कही है. इसके साथ ही, एन. चंद्रशेखरन ने विजनरी अंदाज में अधिकारियों से कहा कि संकट खत्म होने के बाद के दौर (Post-Crisis Era) के लिए भी कंपनियां पूरी तरह तैयार रहें. जैसे ही हालात सामान्य हों, कंपनियां तेजी से और पूरी क्षमता के साथ दोबारा काम शुरू करने का जज्बा बनाए रखें.