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  • 2026-04-05

Jharkhand News: पत्नी शीला मरांडी ने जेल से लिखा पत्र, "कोई परिजन नहीं", प्रशासन से अंतिम संस्कार कराने का अनुरोध

Jharkhand: प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के वरिष्ठ नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस का 3 अप्रैल को रांची के रिम्स अस्पताल में निधन हो गया। उनकी तबीयत लंबे समय से खराब बताई जा रही थी और इलाज के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली।

मौत के बाद उनके शव को रिम्स के मोर्चरी में सुरक्षित रखा गया है, जबकि आगे की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।

पत्नी ने प्रशासन से किया अंतिम संस्कार का अनुरोध
प्रशांत बोस की पत्नी शीला मरांडी, जो खुद भी माओवादी संगठन की शीर्ष नेता हैं और वर्तमान में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद हैं, उन्होंने जेल प्रशासन के माध्यम से जिला प्रशासन को पत्र भेजा है।

पत्र में उन्होंने बताया कि उनके पति का कोई नजदीकी परिजन मौजूद नहीं है, ऐसे में जिला प्रशासन ही उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे।

एक करोड़ का इनामी, कई राज्यों में सक्रिय रहा नेटवर्क
प्रशांत बोस माओवादी संगठन के उन प्रमुख चेहरों में शामिल था, जिनका प्रभाव कई राज्यों तक फैला हुआ था। उसकी गिरफ्तारी के समय उस पर सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

झारखंड समेत अन्य राज्यों में नक्सल गतिविधियों को संगठित करने में उसकी अहम भूमिका मानी जाती रही है।

2021 में हुई थी गिरफ्तारी
झारखंड पुलिस ने 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा क्षेत्र स्थित मुंडरी चेक पोस्ट के पास प्रशांत बोस को उसकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया था।

बताया जा रहा है कि उस समय वह इलाज के लिए कहीं जा रहा था। इस कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने उसके साथ चार अन्य माओवादियों को भी पकड़ा था।

दर्जनों मामलों में था आरोपी
प्रशांत बोस के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में 70 से अधिक मामले दर्ज थे। वह लंबे समय से सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था और उसकी गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना गया था।

पत्नी भी संगठन में अहम भूमिका में
शीला मरांडी भी भाकपा (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी की सदस्य रही हैं और नारी मुक्ति संघ की प्रमुख के रूप में सक्रिय रही हैं। संगठन में उनकी भूमिका भी काफी प्रभावशाली मानी जाती है।

प्रशासन के सामने अब अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी
चूंकि मृतक के परिवार का कोई सदस्य आगे नहीं आया है, ऐसे में अब जिला प्रशासन के सामने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी है। आने वाले समय में प्रशासन इस संबंध में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अंतिम निर्णय लेगा।

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