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  • 2026-04-02

Assam Election 2026: असम के रण में हेमंत सोरेन की दहाड़, कहा:- तीर-धनुष ही दिलाएगा सरुपथर के चाय बागान श्रमिकों को असली हक

Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव के सियासी समर में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. पार्टी के सबसे बड़े स्टार प्रचारक और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के सरुपथर विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने स्थानीय जनता और विशेष रूप से चाय बागान में हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले श्रमिकों के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित किया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गरजते हुए कहा कि “तीर-धनुष” केवल एक राजनीतिक दल का चुनाव चिह्न भर नहीं है, बल्कि यह सदियों से शोषितों, वंचितों और दबे-कुचलों के अधिकारों की रक्षा करने वाला सबसे बड़ा अचूक हथियार रहा है.

असम की सत्ता पर तीखा प्रहार: चाय श्रमिकों को समझा सिर्फ वोट बैंक
अपने धुआंधार संबोधन में हेमंत सोरेन ने असम की मौजूदा सत्ताधारी राजनीति और विपक्षी रवैये पर सीधा प्रहार किया. उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा कि बरसों से यहां की भोली-भाली जनता और विशेष रूप से झारखंडी मूल के चाय बागान श्रमिकों का केवल वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया गया है. चुनाव बीतते ही नेताओं द्वारा उनके हक को हाशिए पर धकेल दिया जाता है. उन्होंने जनता से मुखातिब होते हुए कहा कि सरुपथर की माटी का असली स्वाभिमान “तीर-धनुष” का प्रतीक ही है, जिसने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सदियों तक जांबाजी से संघर्ष किया है. अब वक्त आ गया है कि चाय बागान के श्रमिक अपनी सामूहिक शक्ति को पहचानें.

9 अप्रैल को तकदीर बदलने की अपील: साहिल मुंडा के लिए मांगा वोट
सरुपथर विधानसभा सीट से जेएमएम के अधिकृत प्रत्याशी साहिल मुंडा के समर्थन में वोट की अपील करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन काफी भावुक नजर आए. उन्होंने जनता से सीधे संवाद करते हुए कहा कि आगामी 9 अप्रैल को होने वाला मतदान केवल किसी एक साधारण विधायक को चुनने का जरिया नहीं है, बल्कि यह सरुपथर की नई तकदीर और तस्वीर लिखने की ऐतिहासिक तारीख है. उन्होंने जनता को पूरा विश्वास दिलाया कि साहिल मुंडा की प्रचंड जीत के साथ ही क्षेत्र के शोषित लोगों को उनके खोए हुए कानूनी और मानवीय अधिकार वापस मिलेंगे और चाय बागान के उपेक्षित क्षेत्रों में चौतरफा विकास की एक नई इबारत लिखी जाएगी.

झारखंड से बाहर जेएमएम का राष्ट्रीय विस्तार, समीकरण बदलने के आसार
गौरतलब है कि झारखंड से बाहर निकलकर पूर्वोत्तर के राज्यों में अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन तलाशने के मिशन के तहत झामुमो असम के चुनावी दंगल में उतरी है. चाय बागानों में काम करने वाले लाखों झारखंडी मूल के आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग यहां एक बड़ी आबादी का हिस्सा हैं, जो चुनाव में हार-जीत तय करने का माद्दा रखते हैं. हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन की धुआंधार जनसभाओं से असम का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. अब देखना यह होगा कि 9 अप्रैल को सरुपथर की जनता ईवीएम (EVM) का बटन दबाकर हेमंत सोरेन की इस भावुक अपील पर मुहर लगाती है या नहीं.
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