Adityapur News: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर में जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच अब सियासी घमासान पूरी तरह तेज हो गया है. ब्रांच रोड पर दशकों से छोटी दुकानें चलाकर गुजर-बसर करने वाले दुकानदारों को अचानक प्रशासनिक नोटिस मिलने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. इसी बीच, पूर्व मुख्यमंत्री सह स्थानीय सरायकेला विधायक चंपाई सोरेन ने गरीब दुकानदारों के समर्थन में उतरते हुए जिला प्रशासन और आवास बोर्ड (हाउसिंग बोर्ड) की इस दंडात्मक कार्रवाई पर बेहद गंभीर कानूनी और नीतिगत सवाल खड़े कर दिए हैं.
मुख्य सड़क साफ करें, लेकिन ब्रांच रोड के गरीबों को न उजाड़ें
सोमवार को आदित्यपुर स्थित स्वर्णरेखा सभागार में विधायक चंपाई सोरेन ने नगर निगम आयुक्त और हाउसिंग बोर्ड के वरीय पदाधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की. बैठक में अधिकारियों को कड़े लहजे में हिदायत देते हुए चंपाई सोरेन ने कहा कि विकास और अतिक्रमण के नाम पर हर बार केवल गरीब दुकानदारों को ही निशाना बनाया जाता है, जो पूरी तरह गलत है. उन्होंने साफ कहा कि सरायकेला-कांड्रा-आदित्यपुर मुख्य मार्ग और उसकी सर्विस रोड पर जो भी अवैध कब्जा है, उसे प्रशासन जरूर हटाए, लेकिन मुख्य सड़क से हटकर अंदरूनी ब्रांच रोड में बरसों से दुकान चला रहे गरीबों को तंग न किया जाए.
आवास बोर्ड की जमीन और व्यावसायिक आवंटन पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों के दोहरे मापदंड पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि शहर की मुख्य और सर्विस रोड के ऊपर ही कई रसूखदारों की बड़ी-बड़ी बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गई हैं. अगर प्रशासन सच में मेन रोड को क्लियर करना चाहता है, तो सबसे पहले नियमों का उल्लंघन करने वाली उन बड़ी बिल्डिंगों को तोड़ा जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने झारखंड आवास बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बोर्ड पहले यह साबित करे कि उसने कुल कितनी जमीन अधिग्रहित की है और उसके पास इसके क्या पुख्ता कागजात हैं, क्योंकि यह जमीन कभी व्यावसायिक उद्देश्यों (कॉमर्शियल पर्पज) के लिए अधिग्रहित नहीं की गई थी.
भूमि अधिग्रहण अधिनियम का हवाला, उतावलेपन में कार्रवाई न करने की चेतावनी
चंपाई सोरेन ने ऐतिहासिक तथ्यों और भूमि अधिग्रहण कानून का हवाला देते हुए अधिकारियों को समझाया कि आज से 60-70 साल पहले जब यह जमीन अधिग्रहित की गई थी, तब बेहद मामूली सरकारी रेट पर स्थानीय मजदूर वर्ग और रैयतों से जमीन ली गई थी. उन्होंने चेतावनी दी कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार, यदि आवास बोर्ड अब उस जमीन को कॉमर्शियल प्लॉट के रूप में बेच रहा है या आवंटित कर रहा है, तो उस प्लॉट के मूल रैयतधारी (जमीन के पुराने मालिक) को आज के बाजार दर का 40 प्रतिशत हिस्सा देना होगा. उन्होंने अफसरों से पूछा कि कॉमर्शियल पर्पज के लिए जमीन देने की यह नियमावली कब और किस राज्य के तहत बनी, उसे सार्वजनिक किया जाए. उन्होंने अधिकारियों को आवेश और उतावलेपन में आकर गरीबों पर कोई भी एकतरफा कार्रवाई न करने की सख्त हिदायत दी, जिसके बाद स्थानीय दुकानदारों ने विधायक का आभार जताया है.