Corporate Sales Rise: NGNF (गैर-सरकारी, गैर-वित्तीय) पब्लिक लिमिटेड कंपनियों के लिए साल 2024-25 अच्छा रहा। इन कंपनियों की कुल बिक्री यानी नेट सेल्स में 7.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले साल 6.3 फीसदी थी। इसे अर्थव्यवस्था के लिए एक पॉजिटिव संकेत माना जा रहा है।
सर्विस सेक्टर आगे और मैन्युफैक्चरिंग भी मजबूत
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर में ग्रोथ देखने को मिली। खासकर सर्विस सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया और इसमें 10.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बिक्री भी 6.3 फीसदी बढ़ी। ये आंकड़े करीब 7,992 कंपनियों के फाइनेंशियल डेटा पर आधारित हैं, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक ने जारी किया है।
ग्रोथ के पीछे के मुख्य कारण
दरअसल, सर्विस सेक्टर में “ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज” और “आईटी व कम्युनिकेशन” जैसे क्षेत्रों में अच्छी मांग रही, जिससे बिक्री बढ़ी। लेकिन दूसरी तरफ खर्च भी बढ़े। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च 8.4 फीसदी तक बढ़ गया।
इसका असर ये हुआ कि कंपनियों का ऑपरेशनल प्रॉफिट (कामकाज से होने वाला मुनाफा) थोड़ा धीमा हो गया। इसकी ग्रोथ घटकर 8.4 फीसदी रह गई, जबकि पिछले साल ये 15.3 फीसदी थी।
कम टैक्स और अतिरिक्त कमाई से मुनाफे में जोरदार उछाल
फिर भी कंपनियों के लिए एक अच्छी बात ये रही कि उनकी नॉन-ऑपरेशनल इनकम (जैसे निवेश से कमाई) बढ़ी और टैक्स का बोझ कम हुआ। इसी वजह से कंपनियों का शुद्ध मुनाफा यानी PAT 23.1 फीसदी तक बढ़ गया। अगर सेक्टर की तुलना करें, तो सर्विस कंपनियों ने 40.2 फीसदी का जबरदस्त मुनाफा ग्रोथ दर्ज किया, जबकि मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का मुनाफा 12.8 फीसदी बढ़ा।
आंतरिक संसाधनों के दम पर ग्रोथ की रफ्तार तेज
इसके अलावा, कंपनियों ने अपने ज्यादातर फंड खुद के अंदरूनी स्रोतों से जुटाए, करीब 57.2 फीसदी फंड वहीं से आया। और इस पैसे का बड़ा हिस्सा नए प्लांट, मशीनरी और एसेट्स बनाने में लगाया गया, जो कुल इस्तेमाल का 41.1 फीसदी रहा। बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी, खर्चों में इजाफा और टैक्स में राहत, इन सबके मिश्रण से कंपनियों का मुनाफा मजबूत बना रहा है।