Jharkhand News: झारखंड में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के समाप्त होने में सिर्फ 2 दिन का समय बचा है, लेकिन सरकार के लिए धान खरीद का विशाल लक्ष्य अब एक बड़ी चुनौती बन गया है. राज्य सरकार ने इस साल कुल 60 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य रखा था, जिसके मुकाबले अब तक केवल 46 लाख 27 हजार 378 क्विंटल धान की ही खरीद हो पाई है. इस कछुआ चाल के कारण सरकारी गोदामों तक लक्ष्य का लगभग 14 लाख क्विंटल धान पहुंचना अभी भी बाकी है.
6 जिलों में स्थिति बेहद दयनीय, एक लाख का आंकड़ा भी नहीं छू सके
चिंता की बात यह है कि राज्य के 6 जिलों में धान खरीद की रफ्तार बेहद सुस्त है, जहां का कुल आंकड़ा अब तक एक लाख क्विंटल तक भी नहीं पहुंच पाया है. इन फिसड्डी जिलों में पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, साहेबगंज, पाकुड़, लोहरदगा और खूंटी शामिल हैं. इन इलाकों में क्रय केंद्रों (लैम्पस) की सुस्ती और पैक्स स्तर पर कप्तानी की कमी को इस विफलता का मुख्य कारण माना जा रहा है, जिससे छोटे और सीमांत किसान बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं.
2450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अब तक 784 करोड़ का भुगतान
राज्य सरकार ने इस बार 15 दिसंबर 2025 से धान की सरकारी खरीद शुरू की थी. किसानों को आर्थिक रूप से संबल देने के लिए इस वर्ष 2450 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की गई थी, जो पिछले साल के मुकाबले 50 रुपये अधिक है. अब तक राज्य के किसानों को कुल 784 करोड़ 43 लाख 56 हजार 200 रुपये का भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जा चुका है. इस राशि में 24 करोड़ 16 लाख रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि (बोनस) भी शामिल है.
पिछले वर्षों के मुकाबले बेहतर, पर मंजिल अभी भी दूर
भले ही सरकार अपने 60 लाख क्विंटल के जादुई आंकड़े से दूर दिख रही हो, लेकिन पिछले तीन वर्षों के ट्रेंड को देखें तो इस बार का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है. वित्तीय वर्ष 2022-23 में 60 लाख के लक्ष्य के मुकाबले केवल 17.16 लाख क्विंटल (29%) धान ही खरीदा जा सका था. वहीं 2023-24 में भी आंकड़ा 17.02 लाख क्विंटल (29%) तक ही सिमट गया था. पिछले साल यानी 2024-25 में सुधार हुआ और 40.8 लाख क्विंटल (67%) धान की खरीद हुई थी, जबकि इस बार अब तक करीब 77% लक्ष्य पूरा कर लिया गया है.
राज्यभर में बनाए गए 801 क्रय केंद्रों पर बचे हुए 2 दिनों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना नामुमकिन सा लग रहा है. अब देखना यह होगा कि क्या सरकार हमेशा की तरह इस बार भी धान खरीद की समय सीमा को आगे बढ़ाती है या नहीं.