Jamshedpur: जमशेदपुर शहर में इन दिनों कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी ने गंभीर रूप ले लिया है। जहां घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य बनी हुई है, वहीं व्यावसायिक उपयोग के लिए गैस उपलब्ध नहीं होने से कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भारत गैस और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपी) द्वारा कमर्शियल गैस की आपूर्ति फिलहाल पूरी तरह बंद कर दी गई है, जबकि इंडेन गैस एजेंसी मांग के मुकाबले केवल करीब 20 प्रतिशत सिलेंडर ही उपलब्ध करा पा रही है।
आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता, छोटे कारोबार ठप होने की कगार पर
सीमित आपूर्ति के चलते प्रशासन द्वारा अस्पतालों की कैंटीन जैसी जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके कारण छोटे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। कई जगहों पर गैस नहीं मिलने के कारण होटल बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इंडेन गैस एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही आपूर्ति को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 50 प्रतिशत तक किया जाएगा, जिससे स्थिति में कुछ सुधार आने की उम्मीद है।
खाड़ी क्षेत्र के तनाव का बाजारों पर असर
मध्य पूर्व (खाड़ी) क्षेत्र में जारी तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों पर भी दिखने लगा है। इसका सीधा प्रभाव परिवहन लागत और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है।
स्टेशनरी बाजार में बढ़ीं कीमतें, अभिभावकों पर बोझ
नए शैक्षणिक सत्र के बीच स्टेशनरी बाजार में भी महंगाई का असर साफ दिख रहा है। किताब, कॉपी और अन्य शैक्षणिक सामग्री के दाम बढ़ने लगे हैं, जिससे अभिभावकों को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ढुलाई महंगी हो गई है। फिलहाल बाजार पुराने स्टॉक के सहारे चल रहा है, लेकिन जैसे ही नया माल आएगा, कीमतों में और वृद्धि होना तय है।
रसायनों की कीमतों में उछाल, उद्योगों की लागत बढ़ी
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में भी संकट गहराता जा रहा है। रासायनिक पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि से उद्योगों की उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है। उदाहरण के तौर पर, सोडियम सायनाइड की कीमत करीब 205 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर लगभग 315 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
इसका सीधा असर धातु और रासायनिक उद्योगों पर पड़ा है, जहां उत्पादन महंगा होता जा रहा है।
उत्पादन घटाने या इकाइयां बंद करने की आशंका
उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के 50 से अधिक कारखानों को उत्पादन कम करना पड़ सकता है या अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
इसका सीधा असर करीब 10 हजार मजदूरों की आजीविका पर पड़ सकता है, जिससे बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ सकती है।
आयात प्रभावित, सप्लाई चेन पर असर
व्यापारियों के अनुसार, कई जरूरी रसायनों का आयात ईरान के मार्ग से होता है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर सीधे उद्योगों और बाजार पर देखने को मिल रहा है।
शहर के कारोबार पर बहुआयामी संकट
कमर्शियल गैस की कमी, बढ़ती महंगाई, परिवहन लागत में इजाफा और कच्चे माल की कमी इन सभी कारणों से शहर का कारोबारी तंत्र प्रभावित हो रहा है। होटल-ढाबों से लेकर बड़े उद्योगों तक हर क्षेत्र इस संकट की मार झेल रहा है।
प्रशासन और कंपनियों पर टिकी उम्मीदें
ऐसे हालात में अब प्रशासन और गैस आपूर्ति करने वाली कंपनियों से जल्द समाधान की उम्मीद की जा रही है। यदि आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।