Palamu: झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व और बूढ़ापहाड़ से सटे संवेदनशील इलाकों में अब हालात धीरे-धीरे बदलते नजर आ रहे हैं। कभी नक्सल गतिविधियों और अवैध शिकार के लिए चर्चित इन क्षेत्रों में अब ग्रामीण खुद आगे बढ़कर प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं। जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियारों की जानकारी दी जा रही है और उन्हें स्वेच्छा से जमा भी किया जा रहा है।
अब तक करीब 40 अवैध हथियार बरामद
वन विभाग के अनुसार, सितंबर 2025 से अब तक टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगभग 40 अवैध हथियार बरामद किए जा चुके हैं। ये सभी 12 बोर के देसी बंदूक हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से वन्यजीवों के शिकार के लिए किया जाता था। इन हथियारों की मारक क्षमता करीब 30 मीटर तक बताई गई है।
जागरूकता अभियान का दिखा असर
वन्यजीव सप्ताह के दौरान वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की थी कि वे अपने पास मौजूद अवैध हथियारों को स्वेच्छा से जमा कर दें। इस पहल का असर भी देखने को मिला और करीब 23 लोगों ने खुद आगे आकर अपने हथियार प्रशासन को सौंप दिए। इसके अलावा कुछ हथियार जंगलों में छोड़ दिए गए थे, जिन्हें बाद में बरामद कर लिया गया।
शिकार की परंपरा से दूरी, मुख्यधारा की ओर कदम
पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रशांत जेना के अनुसार, क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसके चलते अब ग्रामीण धीरे-धीरे पारंपरिक शिकार की आदत छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। हालांकि, जो लोग अब भी अवैध हथियार अपने पास रखे हुए हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
सीमावर्ती गांवों में बदल रही सोच
झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे कई गांवों में लंबे समय से शिकार की परंपरा रही है, लेकिन अब इस सोच में बदलाव आने लगा है। प्रशासन और वन विभाग की पहल से वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ी है, जिसका सकारात्मक प्रभाव भविष्य में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
यह बदलाव न सिर्फ वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में भी एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।