Floating Solar Plant: झारखंड की राजधानी रांची के लिए बिजली संकट से निपटने की दिशा में एक उपलब्धि जुड़ने जा रही है. गेतलसूद डैम पर 100 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगभग बनकर तैयार हो चुका है. करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना से शहर के लगभग 1 लाख घरों को बिना किसी कटौती के निर्बाध बिजली मिलने की उम्मीद है. यह प्लांट न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा.
केंद्रीय मंत्रियों की मुलाकात और लोकार्पण पर बनी सहमति
इस बड़े प्रोजेक्ट के उद्घाटन की तैयारियां अब तेज हो गई हैं. केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर प्रोजेक्ट की प्रगति की विस्तृत जानकारी साझा की. उन्होंने केंद्र सरकार से इस परियोजना के जल्द लोकार्पण का आग्रह किया, जिस पर सैद्धांतिक सहमति मिल गई है. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए बताया गया कि यह झारखंड का अपनी तरह का एक अनूठा और बड़ा प्रोजेक्ट है जो सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मिसाल बनेगा.
दिसंबर 2021 से अब तक का सफर और बिजली संकट का समाधान
करीब 172 एकड़ के विशाल जल क्षेत्र में फैले इस सोलर पावर प्लांट से रांची और इसके आसपास के इलाकों में बिजली की किल्लत काफी हद तक दूर हो जाएगी. इस परियोजना का प्रस्ताव दिसंबर 2021 में भेजा गया था, जिसे केंद्र ने महज 3 महीने में मंजूरी दे दी थी. मार्च 2022 से शुरू हुआ निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है. इस प्लांट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पानी की सतह पर तैरता रहेगा, जिससे जमीन की बचत होगी और पानी के वाष्पीकरण में भी कमी आएगी.
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता झारखंड
इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट के शुरू होते ही रांची को पारंपरिक बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम करनी होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिजली की दरें भी स्थिर रह सकती हैं और गर्मियों के दौरान होने वाली लोड शेडिंग से बड़ी राहत मिलेगी.