Jharkhand: झारखंड में वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या और सड़क सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए राज्य सरकार ने परिवहन विभाग को और अधिक सशक्त बनाने का बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने मोटरयान निरीक्षक (MVI) के 21 नए पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है, जिससे राज्य में एमवीआई के कुल स्वीकृत पदों की संख्या अब 49 से बढ़कर 70 हो गई है। परिवहन विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिसका मुख्य उद्देश्य यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है।
जिलों में मैनपावर का विस्तार और पदों का आवंटन
बड़े जिलों में बढ़ते कार्यभार को देखते हुए नए पदों का आवंटन रणनीतिक तरीके से किया गया है। इसके तहत राजधानी रांची, हजारीबाग और पूर्वी सिंहभूम जैसे प्रमुख केंद्रों में दो-दो अतिरिक्त एमवीआई तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही पश्चिमी सिंहभूम, गढ़वा और पाकुड़ में भी दो-दो नए पदों को स्वीकृति मिली है, जबकि धनबाद, गुमला, लोहरदगा, कोडरमा, चतरा, साहेबगंज, लातेहार, सिमडेगा और जामताड़ा जैसे अन्य जिलों में एक-एक अतिरिक्त पद सृजित किया गया है। सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में वाहनों के भारी दबाव के कारण फिटनेस जांच, ड्राइविंग टेस्ट और टैक्स वसूली जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में देरी हो रही थी, जिसे अब इन नई नियुक्तियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से दूर किया जा सकेगा।
सड़क सुरक्षा और तकनीकी फिटनेस पर रहेगा जोर
नवनियुक्त मोटरयान निरीक्षकों की भूमिका सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम होगी। ये निरीक्षक न केवल कमर्शियल और निजी वाहनों की तकनीकी फिटनेस की बारीकी से जांच करेंगे, बल्कि सड़क हादसों के बाद वाहनों का तकनीकी मुआयना भी करेंगे ताकि दुर्घटना के सटीक कारणों का पता चल सके। इसके अलावा, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले चालकों की दक्षता की कड़ी जांच, मोटर वाहन कर संग्रह को दुरुस्त करना और प्रदूषण नियंत्रण मानकों की निगरानी भी उनके मुख्य कर्तव्यों में शामिल होगी। आपदा की स्थिति में वाहनों के अधिग्रहण और सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियानों को सफल बनाने में भी इनकी सक्रिय भागीदारी रहेगी।
विभागीय बजट और भविष्य की कार्ययोजना
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन 21 नए पदों पर होने वाले वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों का वहन परिवहन विभाग के मौजूदा बजट से ही किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एमवीआई की संख्या बढ़ने से अब एक ही अधिकारी पर कई जिलों का बोझ नहीं रहेगा, जिससे काम में पारदर्शिता आएगी और आम जनता को अपने वाहन संबंधी कार्यों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह कदम झारखंड को एक सुरक्षित और आधुनिक परिवहन तंत्र की ओर ले जाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।