Govindpur Water Crisis: गुरुवार को आई तेज आंधी और बारिश के दौरान गोविंदपुर जलापूर्ति योजना का 160 केवीए का समर्पित ट्रांसफॉर्मर हाई वोल्टेज की चपेट में आकर जल गया. इस हादसे में केवल ट्रांसफॉर्मर ही नहीं, बल्कि पंप हाउस में लगे तीन एसी, 55 इंच की टीवी, आधुनिक स्कडा सिस्टम और फ्लो मीटर भी पूरी तरह खाक हो गए हैं. करंट इतना जोरदार था कि पूरा कंट्रोल सिस्टम डैमेज हो गया है, जिसकी मरम्मत के लिए मुख्य उपकरणों को जमशेदपुर से घाटशिला वर्कशॉप भेजा गया है.
डेढ़ लाख की आबादी बूंद-बूंद को तरसी
जलापूर्ति ठप होने का सीधा असर गोविंदपुर की 22 पंचायतों पर पड़ा है, जिससे करीब डेढ़ लाख लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हुई है. शुक्रवार और शनिवार को पानी की एक बूंद भी नलों से नहीं टपकी, जिसके कारण लोग अब चापाकल, पड़ोसियों की बोरिंग और निजी टैंकरों के भरोसे रहने को मजबूर हैं. विभाग का अनुमान है कि ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत और पूरे सिस्टम को दोबारा पटरी पर लाने में कम से कम आठ दिन का समय लग सकता है.
टाटा स्टील यूआईएसएल को जिम्मा देने की मांग
इस संकट को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है. जिला परिषद सदस्य डॉ. परितोष सिंह ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र इस समस्या को सुलझाने में नाकाम रहा है. उन्होंने जनहित में इस पूरी जलापूर्ति योजना का संचालन "टाटा स्टील यूआईएसएल" (पुराना नाम जुस्को) को सौंपने की जोरदार मांग की है. उनका तर्क है कि प्रोफेशनल एजेंसी के पास ऐसे संकटों से निपटने के लिए बेहतर बैकअप प्लान होता है.
आंदोलन की चेतावनी और टैंकर की मांग
डॉ. परितोष सिंह ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त पानी के टैंकर नहीं भेजे गए और मरम्मत कार्य में तेजी नहीं आई, तो वे जनता के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेंगे. फिलहाल, जलापूर्ति योजना के परिसर में सन्नाटा पसरा है और कर्मचारी घाटशिला से आने वाली रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. प्रशासन पर अब दबाव है कि वह वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए लोगों तक राहत पहुंचाए.