Ranchi News: रांची बिरसा मुंडा हवाई अड्डा पर विमान संचालन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए संचार, नेविगेशन और सर्विलांस (CNS) विभाग की ओर से ILS (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) और DVOR (डॉप्लर वीएचएफ ओम्निडायरेक्शनल रेंज) की सफल फ्लाइट कैलिब्रेशन प्रक्रिया पूरी की गई. इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी संयुक्त महाप्रबंधक (CNS) अनिल कुमार कश्यप ने की.
कैलिब्रेशन के दौरान उड़ान के समय होने वाली तकनीकी जांच का नेतृत्व एजीएम (CNS) नवीन डूडी ने किया. वहीं जमीन पर मौजूद तकनीकी टीम का नेतृत्व एजीएम (CNS) प्रभात कुमार ने संभाला. दोनों टीमों के बेहतर तालमेल से यह महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया.
क्या है ILS?
ILS एक आधुनिक तकनीक है, जो खराब मौसम या कम दृश्यता के दौरान पायलट को विमान को सही दिशा में रनवे तक लाने और सुरक्षित लैंडिंग कराने में मदद करती है. दूसरी ओर DVOR प्रणाली पायलट को हवाई अड्डे की दिशा बताती है, जिससे विमान अपनी उड़ान का मार्ग सही तरीके से तय कर सकता है.
इन उपकरणों की समय-समय पर जांच करना जरूरी होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये पूरी तरह सही और सटीक संकेत दे रहे हैं. इसके लिए एक विशेष विमान का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें अत्याधुनिक जांच उपकरण लगे होते हैं. यह विमान हवाई अड्डे के आसपास अलग-अलग ऊंचाई और दिशा में उड़ान भरकर इन प्रणालियों के सिग्नल की सटीकता की जांच करता है. साथ ही जमीन पर लगे उपकरणों का भी परीक्षण किया जाता है.
फ्लाइट इंस्पेक्शन यूनिट की अहम भूमिका
इस पूरी प्रक्रिया में फ्लाइट इंस्पेक्शन यूनिट (FIU) की अहम भूमिका होती है. यह इकाई देशभर के हवाई अड्डों पर लगे नेविगेशन उपकरणों की उड़ान के माध्यम से जांच करती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सही तरीके से काम कर रहे हैं.
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के CNS विभाग के प्रशिक्षित इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर इस काम को अंजाम देते हैं. उनकी तकनीकी विशेषज्ञता के कारण हवाई अड्डे पर आने-जाने वाले विमानों का संचालन सुरक्षित और भरोसेमंद बना रहता है.