Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में युद्ध की आग बेकाबू होती जा रही है. इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान पर हमलों का नया और विनाशकारी दौर शुरू कर दिया है. ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिमी तेहरान के घनी आबादी वाले इलाकों को निशाना बनाया गया है, जिससे पूरे शहर में काले धुएं का गुबार छा गया है. रविवार रात इजरायली सेना ने तेहरान के गांधी हॉस्पिटल, एक पुलिस बिल्डिंग और नेशनल रेडियो-टेलीविजन हेडक्वार्टर पर भीषण बमबारी की है.
ट्रंप की चेतावनी: “सैनिकों की मौत का लेंगे बदला”
कुवैत में ईरानी मिसाइल हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. ट्रंप ने कसम खाई है कि वे अपने सैनिकों की मौत का बदला लेकर रहेंगे. अमेरिकी सेना ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि 28 फरवरी के हमले के बाद अब तक ईरान में 1,000 से अधिक ठिकानों को ध्वस्त किया जा चुका है. गौरतलब है कि 28 फरवरी की बमबारी में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और 40 से अधिक शीर्ष अधिकारियों के मारे जाने की खबर है.
ईरान का पलटवार: इजरायल और खाड़ी देशों में धमाके
ईरान ने भी इस हमले का करारा जवाब दिया है. ईरान की मिसाइलों ने इजरायल के तेल अवीव, हाइफा और बेत शेमेश शहर को निशाना बनाया है, जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई है. सिर्फ इजरायल ही नहीं, ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी हमले शुरू कर दिए हैं. रविवार रात कतर, बहरीन, जॉर्डन, ओमान, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारी धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है.
पश्चिमी देशों की गोलबंदी: ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी अमेरिका के साथ
इस महायुद्ध में अब यूरोपीय शक्तियां भी खुलकर अमेरिका के समर्थन में आ गई हैं. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है. इन तीनों देशों ने कहा है कि वे ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को उनके स्रोत (Source) पर ही खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर “रक्षात्मक कार्रवाई” करने को तैयार हैं.
सात देशों ने एक सुर में की ईरान की निंदा
अमेरिका सहित खाड़ी के प्रमुख देशों यानी बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और UAE ने एक साझा बयान जारी कर ईरान की हरकतों को “लापरवाह और खतरनाक” करार दिया है. इन देशों का कहना है कि तेहरान की वजह से इलाके की स्थिरता खतरे में है और वे अपने नागरिकों व बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए एकजुट हैं. इन देशों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.