Jharkhand Health News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई ऊंचाई देते हुए हेलीकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस (HEMS) के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. अब तक राज्य में एयर एंबुलेंस की सुविधा केवल रांची जैसे बड़े हवाई अड्डों तक सीमित थी, जिससे सुदूर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के मरीजों को समय पर इलाज मिलना मुश्किल होता था. हालिया एयर एंबुलेंस हादसे के बाद सरकार ने इस प्रक्रिया में तेजी लाते हुए सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर आधारित इस सेवा को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने का फैसला किया है.
हेलीकॉप्टर एंबुलेंस की जरूरत क्यों पड़ी?
नागर विमानन प्रभाग के अनुसार, वर्तमान में संचालित एयर एंबुलेंस केवल उन्हीं शहरों में लैंड कर सकती है जहां हवाई पट्टी (Airstrip) उपलब्ध है. झारखंड के कई दुर्गम इलाकों में हवाई पट्टी न होने के कारण गंभीर मरीजों को पहले सड़क मार्ग से घंटों सफर कर एयरपोर्ट लाना पड़ता था, जिससे अक्सर “गोल्डन ऑवर” (इलाज का कीमती समय) निकल जाता था. नई हेलीकॉप्टर सेवा की खासियत यह है कि यह किसी भी सुरक्षित छोटे मैदान या हेलिपैड पर लैंड कर सीधे मरीज को लिफ्ट कर सकेगी, जिससे जान बचने की संभावना बढ़ जाएगी.
सरकार का खर्च और परिचालन की योजना
इस महत्वाकांक्षी योजना पर सरकार हर महीने लगभग 79 लाख रुपये खर्च करेगी. यह गणना “न्यूनतम उड़ान गारंटी” (प्रति माह 35 घंटे) के आधार पर की गई है. बाजार की मौजूदा दर के अनुसार, सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर का किराया लगभग 2.25 लाख रुपये प्रति घंटा (GST अतिरिक्त) है. हालांकि, अंतिम दरें टेंडर (निविदा) प्रक्रिया के बाद “L-1” (न्यूनतम बोली) के आधार पर तय की जाएंगी. सरकार का लक्ष्य है कि आपातकालीन स्थिति में बिना किसी वित्तीय बाधा के मरीजों को त्वरित सहायता मिले.
कैसे ले पाएंगे इस सेवा का लाभ?
सरकार इस सेवा के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर रही है. वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
शहरी क्षेत्रों के लिए: यदि किसी मरीज को एक जिले से दूसरे जिले या रांची रेफर करना है, तो संबंधित सरकारी अस्पताल के प्रभारी सीधे सिविल सर्जन को मांग भेजेंगे. इसके बाद सिविल सर्जन अस्पताल के निकटतम लैंडिंग स्थल के “कॉर्डिनेट्स” (लोकेशन) के साथ नागर विमानन प्रभाग से हेलीकॉप्टर का अनुरोध करेंगे.
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए: अति गंभीर स्थिति में मरीज के परिजन 108 एम्बुलेंस सर्विस पर कॉल कर हेलीकॉप्टर की मांग कर सकते हैं. ग्रामीण स्तर पर पंचायत सचिव, प्रखंड स्तर पर चिकित्सा पदाधिकारी और जिला स्तर पर सिविल सर्जन को नोडल अधिकारी बनाया गया है. नोडल अधिकारी मरीज की मेडिकल कंडीशन की पुष्टि करने के बाद तुरंत सेवा उपलब्ध कराने की अनुशंसा करेंगे.
इस सेवा के शुरू होने से झारखंड के नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी देश के बड़े अस्पतालों तक समय पर पहुंचने का मौका मिलेगा.