Jharkhand News: झारखंड के अस्पतालों और नर्सिंग होम से निकलने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट (जैव-चिकित्सा अपशिष्ट) के उचित निस्तारण को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए याचिका को निष्पादित कर दिया.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सरकार के प्रयासों की सराहना
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने इस मामले में प्रार्थी “झारखंड ह्यूमन राइट कनफेडरेशन”, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) और राज्य सरकार के साझा प्रयासों की सराहना की. अदालत ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सभी पक्षों के सार्थक प्रयासों के कारण अब राज्य के अस्पतालों और क्लीनिकों से निकलने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट का सुचारू रूप से उठाव और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है.
अदालत ने दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
याचिका को निष्पादित करते हुए हाईकोर्ट ने भविष्य के लिए भी कड़े दिशा-निर्देश दिए हैं, ताकि कचरा प्रबंधन की यह व्यवस्था निरंतर बनी रहे और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे. मामले की पैरवी प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता समावेश देव ने की, जबकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पक्ष अधिवक्ता ऋचा संचिता ने मजबूती से रखा.