Delhi: देश की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को देश की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति पेश की, जिसे प्रहार नाम दिया गया है। यह नीति आतंकवाद के विरुद्ध भारत की जीरो टॉलरेंस की रणनीति को एक ठोस और व्यवस्थित ढांचा प्रदान करती है।
मुख्य विशेषताएं, बिना किसी भेदभाव के कड़ा प्रहार
नीति के मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि भारत आतंकवाद को किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या सभ्यता से जोड़कर नहीं देखता। इसका एकमात्र उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और राष्ट्र की अखंडता को बनाए रखना है।
नई तकनीक और उभरते खतरों से मुकाबला
प्रहार नीति में आधुनिक युग की चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जैसे इंटरनेट के जरिए भर्ती और जिहाद के महिमामंडन पर सख्त निगरानी। डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट के माध्यम से होने वाली टेरर फंडिंग को रोकना। सीमा पार से होने वाले ड्रोन हमलों और साइबर अपराधों के खिलाफ नई सुरक्षा नियमावली।
जल, थल और नभ, सुरक्षा का त्रि-स्तरीय घेरा
सरकार ने स्वीकार किया है कि भारत को तीनों मोर्चों पर खतरों का सामना है। इसके लिए रेलवे, विमानन, बंदरगाह, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के सुरक्षा प्रोटोकॉल को पहले से अधिक मजबूत किया गया है।
एजेंसियों में तालमेल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, आतंकवाद के वैश्विक नेटवर्क को तोड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा खुफिया जानकारी पर जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य केवल आतंकवाद को खत्म करना ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी बढ़ाकर उन स्थितियों को भी समाप्त करना है जो कट्टरपंथ को जन्म देती हैं।