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  • 2026-02-22

Health Minister Irfan Ansari: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा कदम, यूपी की कानून-व्यवस्था को लेकर राष्ट्रपति को लिखा पत्र, राष्ट्रपति शासन की मांग

Jharkhand: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों और उलेमाओं के साथ हो रही कथित हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक तीखा पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने तक की मांग कर दी है।

क्या मुसलमान होना अपराध है, अंसारी का भावुक सवाल

डॉ. अंसारी ने अपने पत्र की शुरुआत अत्यंत भावुक और आक्रोशित शब्दों में की। उन्होंने लिखा, एक पुत्र आज अत्यंत पीड़ा के साथ आपको यह पत्र लिख रहा है। उन्होंने संविधान की प्रस्तावना का हवाला देते हुए राष्ट्रपति से पूछा कि क्या सबका साथ, सबका विकास महज एक राजनीतिक नारा बनकर रह गया है, उन्होंने सीधे तौर पर सवाल किया, महोदया, क्या इस देश में मुसलमान होना अपराध बनता जा रहा है

वायरल वीडियो और अक्षय ठाकुर का जिक्र

मंत्री ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो का विशेष रूप से उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित बजरंग दल से जुड़े अक्षय ठाकुर द्वारा एक व्यक्ति के साथ की गई अमानवीय हिंसा और धार्मिक आधार पर सार्वजनिक बेइज्जती दिल दहला देने वाली है। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों पर प्रहार है।

योगी सरकार पर तीखा हमला, सरकार नहीं, जात-पात की पाठशाला

डॉ. अंसारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने पत्र में लिखा उत्तर प्रदेश सरकार निष्पक्ष शासन देने में विफल रही है। वहां सरकार नहीं, बल्कि जात-पात की पाठशाला चल रही है। यूपी की घटनाओं के कारण झारखंड, बिहार और बंगाल के लोगों में भारी आक्रोश है। रमजान जैसे पवित्र महीने में भी यदि अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो यह राष्ट्र की आत्मा पर घाव के समान है।यदि शासन निष्पक्ष नहीं है और पीड़ितों को न्याय का भरोसा नहीं मिलता, तो यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति है।

राष्ट्रपति से की गई तीन मुख्य मांगें

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने राष्ट्रपति से संविधान की संरक्षक होने के नाते त्वरित हस्तक्षेप की अपील की है और निम्नलिखित मांगें रखी हैं, उत्तर प्रदेश की वर्तमान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर राष्ट्रपति भवन तुरंत संज्ञान ले। यूपी सरकार से इन घटनाओं पर एक विस्तृत और सार्वजनिक रिपोर्ट तलब की जाए। यदि संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने पर गंभीरता से विचार किया जाए।

झारखंड के जुड़ाव का दिया हवाला

अपने पत्र के अंत में डॉ. अंसारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को झारखंड के साथ उनके पुराने जुड़ाव की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति झारखंड की संस्कृति, यहां के लोगों के अपनेपन और मिठास से बखूबी वाकिफ हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में शांति, सद्भाव और न्याय की पुनर्स्थापना हेतु राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का प्रयोग करेंगी।

यह पत्र ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न राज्यों असम, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से भी अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की खबरें चर्चा में हैं। डॉ. अंसारी का यह पत्र न केवल एक राजनीतिक बयान है, बल्कि यह आने वाले समय में केंद्र और विपक्षी शासित राज्यों के बीच एक बड़े वैचारिक और राजनीतिक टकराव का संकेत दे रहा है।
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