Jharkhand News: चुनाव आयोग के सचिव पवन दीवान ने गुरुवार को देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी "SIR" का ऐलान कर दिया है। इसके तहत झारखंड, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में अप्रैल महीने से घर-घर जाकर वोटरों की जांच का काम शुरू हो जाएगा। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखकर तैयारियां युद्ध स्तर पर पूरी करने को कहा है।
क्या है SIR और आपको क्या करना होगा?
SIR एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें वोटर लिस्ट को पूरी तरह "फिल्टर" किया जाता है। इस अभियान के दौरान बीएलओ (BLO) सीधे आपके घर दस्तक देंगे। वे आपको एक फॉर्म देंगे जिसमें दर्ज जानकारी का मिलान आपको अपनी आईडी से करना होगा। अगर आपका नाम दो अलग-अलग जगहों की वोटर लिस्ट में है, तो आपको एक जगह से नाम कटवाना होगा। वहीं, अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं है, तो आप जरूरी दस्तावेज देकर तुरंत नाम जुड़वा सकेंगे। यह इसलिए जरूरी है ताकि वोटर लिस्ट पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बने।
इन 12 दस्तावेजों से बनेगा काम
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधार के लिए आयोग ने दस्तावेजों की एक विस्तृत सूची जारी की है। आप आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट, निवास प्रमाणपत्र या जाति प्रमाणपत्र जैसे कागजात दिखा सकते हैं। इसके अलावा पेंशनर आईडी, सरकारी पहचान पत्र, जमीन आवंटन पत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र या परिवार रजिस्टर में दर्ज नाम भी पहचान के तौर पर मान्य होंगे।
21 साल का इंतजार होगा खत्म
दरअसल, देश में 1951 से 2004 तक का रिवीजन तो हुआ है, लेकिन पिछले 21 सालों से "इंटेन्सिव" लेवल पर यह प्रक्रिया बाकी थी। इस लंबे अंतराल में लाखों लोग एक शहर से दूसरे शहर जाकर बस गए हैं, कई लोगों की मृत्यु के बाद भी नाम लिस्ट में दर्ज हैं, और कुछ अयोग्य नागरिकों के नाम भी सूची में जुड़ने की शिकायतें मिली हैं। इस SIR अभियान का मुख्य मकसद यही है कि कोई भी योग्य मतदाता न छूटे और किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम लिस्ट में न रहे।