Ranchi News: रांची के चर्चित बड़गाईं जमीन घोटाले में आरोपी आर्किटेक्ट विनोद सिंह की मुश्किलों पर आज अदालत में अहम चर्चा हुई. साढ़े आठ एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़े इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विनोद सिंह ने रांची के पीएमएलए कोर्ट में डिस्चार्ज पिटीशन (दोषमुक्त करने की याचिका) दाखिल की है, जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई.
अदालत में निर्दोष होने का दावा
सुनवाई के दौरान विनोद सिंह के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने दलील दी कि इस पूरे मामले में विनोद सिंह की कोई संलिप्तता नहीं है और वे पूरी तरह निर्दोष हैं. बचाव पक्ष की ओर से एक लिखित आवेदन भी कोर्ट को सौंपा गया है, जिसमें केस से मुक्त करने की गुहार लगाई गई है. विनोद सिंह के पक्ष को सुनने के बाद अब अदालत इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का पक्ष सुनेगी, जिसके बाद ही उनकी याचिका पर कोई फैसला आएगा.
किन-किन पर है शिकंजा?
गौरतलब है कि इस हाई-प्रोफाइल जमीन घोटाले में ईडी पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. इसमें विनोद सिंह के अलावा बड़गाईं अंचल के निलंबित राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, जमीन कारोबारी अंतू तिर्की, हिलेरियस कच्छप और रैयत राजकुमार पाहन जैसे नाम शामिल हैं. राहत की बात यह है कि इस केस से जुड़े सभी आरोपियों को फिलहाल जमानत मिल चुकी है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अब डिस्चार्ज पिटीशन के दौर में पहुंच गई है.
विनोद सिंह की डिस्चार्ज पिटीशन इस केस में एक महत्वपूर्ण मोड़ है. यदि अदालत उनकी दलीलों को स्वीकार करती है, तो यह ईडी की जांच के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है. हालांकि, ईडी आमतौर पर ऐसे मामलों में कड़े डिजिटल सबूत और मनी ट्रेल का हवाला देती है. अब सबकी निगाहें ईडी के जवाब पर टिकी हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि विनोद सिंह को ट्रायल का सामना करना पड़ेगा या वे इस कानूनी लड़ाई से बाहर हो जाएंगे.