ग्रहण का समय और अवधि
भारतीय समयानुसार, सूर्य ग्रहण की प्रक्रिया दोपहर 3:26 बजे शुरू होगी और शाम 7:57 बजे इसका समापन मोक्ष होगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट की रहेगी। ग्रहण का आरंभ, दोपहर 3:26 बजे पूर्ण ग्रहण का चरण, शाम 5:13 बजे से 6:11 बजे तक लगभग 58 मिनट, ग्रहण का मध्य शाम 5:42 बजे, समापन, शाम 7:57 बजे तक होगा।
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच इस तरह आ जाता है कि वह सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता, तो सूर्य का मध्य हिस्सा काला पड़ जाता है और उसके किनारे एक चमकदार रिंग की तरह दिखाई देते हैं। इसे ही वलयाकार सूर्य ग्रहण या रिंग ऑफ फायर कहा जाता है।
भारत में नहीं दिखेगा असर, मंदिरों के पट खुले
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के क्षेत्रों जैसे अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, चिली और अर्जेंटीना में दिखाई देगा। भारत में यह अदृश्य रहेगा, जिसके कारण यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
आमतौर पर ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन भारत में दृश्यता न होने के कारण आज देशभर के मंदिरों में सामान्य दिनों की तरह ही पूजा-पाठ, आरती और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जा रहे हैं। श्रद्धालु बिना किसी संकोच के दर्शन कर रहे हैं।
कुंभ राशि पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका
ज्योतिष गणना के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि में लगने जा रहा है। इस समय सूर्य का गोचर कुंभ राशि में है और वहां पहले से राहु की उपस्थिति है। सूर्य और राहु की यह युति ज्योतिषीय दृष्टि से संवेदनशील मानी जा रही है, जो विशेष रूप से कुंभ राशि के जातकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
2026 के आगामी ग्रहण
साल 2026 खगोलीय घटनाओं से भरा रहने वाला है। आज के सूर्य ग्रहण के बाद 3 मार्च 2026 साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा, जो भारत में दिखाई देगा। 12 अगस्त 2026, साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा, हालांकि यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा।
सावधानी की सलाह
भले ही यह ग्रहण भारत में न दिखे, लेकिन जिन देशों में यह दृश्य है, वहां के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसे कभी भी नग्न आंखों से न देखें। हमेशा प्रमाणित सोलर फिल्टर या ग्रहण वाले चश्मों का ही प्रयोग करें।