Jharkhand Municipal Elections: आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए मतदान की पद्धति में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. इस बार मतदाता इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बजाय मतपत्र यानी बैलेट पेपर के जरिए अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि मतदाता बिना किसी भ्रम के अपनी पसंद के उम्मीदवार को चुन सकें.
मतदान का तरीका और क्रॉस मार्क का उपयोग
मतदान केंद्र पर वोट डालने के लिए मतदाताओं को स्याही लगी एक विशेष रबर की मुहर दी जाएगी. इस मुहर को दबाने पर मतपत्र पर एक क्रॉस (X) का निशान उभरेगा. मतदाताओं को अपने पसंदीदा प्रत्याशी के नाम के सामने बने खाने में इस मुहर को लगाना होगा. वोट देने से पहले मतदाताओं को निर्धारित रजिस्टर या स्थान पर अपने हस्ताक्षर करने होंगे. जो मतदाता पढ़े-लिखे नहीं हैं, वे हस्ताक्षर के स्थान पर अपने अंगूठे का निशान लगा सकेंगे.
उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर मतपत्र का स्वरूप
निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों की संख्या के अनुसार मतपत्रों का आकार और डिजाइन भी तय कर दिया है. यदि किसी क्षेत्र में नौ तक उम्मीदवार हैं, तो मतपत्र एक कॉलम वाला होगा. नौ से अधिक और अठारह तक उम्मीदवार होने पर दो कॉलम वाले मतपत्र का उपयोग किया जाएगा. इससे अधिक प्रत्याशी होने पर कॉलम की संख्या बढ़ाई जा सकती है. मतपत्र पर बाईं ओर उम्मीदवार का नाम और दाईं ओर उनका चुनाव चिह्न अंकित रहेगा. प्रत्येक प्रत्याशी के लिए निर्धारित जगह और चुनाव चिह्न के आकार को भी मानक के अनुरूप रखा गया है.
रंगों के आधार पर पदों की पहचान
वोटरों की सुविधा के लिए अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग रंगों के मतपत्रों का चुनाव किया गया है. महापौर और अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के लिए हल्के गुलाबी रंग का बैलेट पेपर होगा, जबकि वार्ड पार्षद पद के लिए सफेद रंग का मतपत्र इस्तेमाल किया जाएगा. हालांकि, रंग अलग होने के बावजूद दोनों ही मतपत्रों को वोट डालने के बाद एक ही मतपेटी (बैलेट बॉक्स) में जमा करना होगा.
विशेष सहायता और मतदाताओं के अधिकार
दृष्टिहीन या शारीरिक रूप से अक्षम मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग ने सहायक ले जाने की अनुमति दी है. सहायक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए. इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि यदि कोई मतदाता हस्ताक्षर करने के बाद भी वोट न देने का निर्णय लेता है, तो उस पर दबाव नहीं डाला जाएगा. ऐसी स्थिति में पीठासीन अधिकारी मतपत्र पर "मतदान करने से इनकार" का उल्लेख करेंगे.