रांची: केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) से हटाए गए 156 निजी सुरक्षाकर्मियों की बहाली को अपनी प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी कीमत पर इन सुरक्षाकर्मियों को दोबारा नौकरी पर लिया जाना चाहिए।
आंसुओं के साथ मंत्री आवास पहुंचे सुरक्षाकर्मी
शनिवार को पिस्का मोड़ स्थित मंत्री आवास पर पहुंचे सुरक्षाकर्मियों ने अपनी व्यथा सुनाई। कई कर्मी भावुक हो उठे और बताया कि 30 जनवरी को बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें अचानक सेवा से हटा दिया गया। उनका कहना है कि उन्होंने लगभग 20 वर्षों तक केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) में ईमानदारी से अपनी सेवाएं दी, फिर भी उन्हें एक झटके में बाहर कर दिया गया।
156 परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट
मंत्री सेठ ने मौके पर ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के निजी सचिव से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं, बल्कि 156 परिवारों के चूल्हे की आग का सवाल है। उन्होंने दोहराया कि इन सुरक्षाकर्मियों की बहाली उनकी प्रतिष्ठा का विषय है और उनके साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीआईपी प्रबंधन के फैसले पर उठे सवाल
सुरक्षाकर्मियों का आरोप है कि वे वर्षों से संस्थान की सुरक्षा में तैनात थे, लेकिन अचानक लिए गए फैसले से उनकी आजीविका छिन गई। मंत्री सेठ ने सीआईपी निदेशक के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह फैसला व्यक्तिगत कारणों से लिया गया है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी समीक्षा होनी चाहिए।
अनिश्चितकालीन धरना और बढ़ता जनसमर्थन
3 फरवरी से सुरक्षाकर्मी सीआईपी परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। आर्थिक तंगी के कारण कई परिवार बच्चों की पढ़ाई, किराया और दवाइयों के खर्च को लेकर परेशान हैं।
स्थानीय विधायक सुरेश बैठा ने भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर इन कर्मियों की पुनर्बहाली की मांग की है। वहीं, राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने भी हस्तक्षेप का आश्वासन दिया है।
राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय को संवेदनहीन बताते हुए विरोध जताया है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है।
दिल्ली रवाना हुई दो सदस्यीय टीम
मंत्री की पहल के बाद सुरक्षाकर्मियों की दो सदस्यीय टीम दिल्ली के लिए रवाना हो गई है। वहां वे संबंधित अधिकारियों से मिलकर अपनी बहाली की मांग रखेंगे।
अब सभी की नजरें केंद्र सरकार के हस्तक्षेप पर टिकी हैं क्या 156 परिवारों को न्याय मिलेगा या आंदोलन और तेज होगा?