Jharkhand Politics: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में नदियों से हो रहे अवैध बालू उत्खनन को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि दुमका जिले के जामा क्षेत्र में प्रशासन की नाक के नीचे बालू की अवैध निकासी जारी है और इसे ट्रकों के जरिए धड़ल्ले से पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है. मरांडी के अनुसार, प्रभावी कार्रवाई न होने से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है.
बालू घाटों के संचालन के लिए दिया सुझाव
बाबूलाल मरांडी ने अवैध खनन रोकने के लिए एक पारदर्शी उपाय सुझाते हुए कहा कि बालू घाटों को मुक्त कर उनका संचालन सीधे ग्राम सभा को सौंप देना चाहिए. उनका तर्क है कि स्थानीय समुदाय को अधिकार मिलने से पारदर्शिता बढ़ेगी, ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और राजस्व का लाभ सीधा गांवों को मिलेगा.
सरकारी राजस्व की हानि और आम जनता की परेशानी
मरांडी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि बालू घाटों की नियमित नीलामी होती, तो राजस्व सीधे सरकारी खजाने में जाता. उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध बिक्री का पैसा सरकारी खाते के बजाय कहीं और जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि सरकार की नीतियों के कारण बालू की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अपना घर बनाना मुश्किल हो गया है.
मुख्यमंत्री से अपील और सुधार की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे गरीब जनता के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं और सस्ती दरों पर बालू की उपलब्धता सुनिश्चित करें. उन्होंने मांग की कि सरकार अवैध खनन पर कठोर कार्रवाई करे, परिवहन की निगरानी बढ़ाए और एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था लागू करे जिससे राज्य के राजस्व की हानि रुके और आम जनता को राहत मिल सके.
बाबूलाल मरांडी का यह बयान झारखंड में लंबे समय से चल रहे बालू संकट और प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है. ग्राम सभा को बालू घाट सौंपने का सुझाव “पेसा कानून” की मूल भावना के अनुरूप है, जो स्थानीय संसाधनों पर ग्रामीणों के अधिकार की बात करता है.