Ranchi News: राजधानी रांची में वन विभाग ने अधिसूचित (सूचित) वन भूमि पर हुए कथित अवैध कब्जे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. यह मामला कांके क्षेत्र के रांची वन प्रमंडल से जुड़ा है, जहां ग्राम रुढ़िया के प्लॉट संख्या 441 पर अतिक्रमण की शिकायत मिली थी. इस कार्रवाई से बुधिया परिवार को बड़ा झटका लगा है.
समाहर्ता-सह-वन प्रमंडल पदाधिकारी, रांची की अदालत ने 36 डिसमिल वन भूमि को 21 दिनों के भीतर खाली करने का स्पष्ट निर्देश दिया है. आदेश में कहा गया है कि तय समय सीमा में जमीन खाली नहीं की गई तो प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा.
भारतीय वन (बिहार संशोधन) अधिनियम, 1989 की धारा 66 (ए) के तहत मामला दर्ज
वन विभाग को शिकायत मिली थी कि संबंधित जमीन पर शेड बनाया गया है और पक्के खंभे (कॉलम) खड़े किए गए हैं. इसके बाद विभाग ने भारतीय वन (बिहार संशोधन) अधिनियम, 1989 की धारा 66 (ए) के तहत मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की.
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया कि यह जमीन उनके पुश्तैनी कब्जे में है और सीमांकन सही तरीके से नहीं हुआ है. हालांकि, संयुक्त सीमांकन और सरकारी अभिलेखों की जांच के बाद इन दावों को खारिज कर दिया गया. प्रमंडलीय अमीन और अंचल अमीन द्वारा की गई संयुक्त मापी में यह साफ हुआ कि निर्माण कार्य अधिसूचित और सीमांकित वन भूमि के अंदर ही किया गया है.
जमीन सुरक्षित वन क्षेत्र में आती है
अदालत ने 14 सितंबर 1956 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि यह जमीन सुरक्षित वन क्षेत्र में आती है. साथ ही झारखंड सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के अनुसार यह भूमि सार्वजनिक श्रेणी में है, जिस पर किसी भी निजी व्यक्ति का कानूनी अधिकार नहीं बनता.
अदालत ने वन क्षेत्र पदाधिकारी, कांके को निर्देश दिया है कि यदि 21 दिनों के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो अनुमंडल प्रशासन की मदद से कब्जा हटाया जाए और इसकी अनुपालन रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए.